नई दिल्ली, 09 अप्रैल 2026।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपू्र्ण विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसके समर्थन का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अवसर भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने का निर्णायक क्षण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देगी और उन्हें न्यायसंगत स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में देश के विविध सांस्कृतिक पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि असम का रोंगाली बिहू, ओडिशा का महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल का पोइला बैशाख, केरल का विषु, तमिलनाडु का पुथांडु और उत्तर भारत का बैसाखी देशवासियों में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और बी. आर. अंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के महत्व को याद दिलाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और उन्होंने राष्ट्र निर्माण में कई क्षेत्रों में योगदान दिया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, खेल, उद्यमिता, सशस्त्र बल और कला में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने नारी शक्ति को हर क्षेत्र में सशक्त पहचान दी है।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि इससे महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है, लेकिन राजनीति और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। प्रधानमंत्री ने इसे बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि महिलाओं की भागीदारी शासन की गुणवत्ता सुधारती है और निर्णय अधिक संतुलित बनते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशकों में महिला आरक्षण को लेकर प्रयास हुए लेकिन पूर्ण सफलता नहीं मिली। उन्होंने सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख किया और कहा कि अब इसे पूरी तरह लागू करने का समय है। 2029 के लोकसभा और भविष्य के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण के प्रावधान लागू होने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि यह निर्णय अब भी टाला गया तो देश में असंतुलन बना रहेगा। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आगे आएं और इसे ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखें। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को समान अवसर देने और उनके सपनों को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर होगा।






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