भोपाल, 07 अप्रैल 2026।मध्यप्रदेश में आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर सरकार ने तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि आयोजन से जुड़े सभी प्रस्तावित कार्य वर्ष 2027 की दीपावली तक हर हाल में पूरे किए जाएं, ताकि समय पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें।
मंत्रि-मंडलीय समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के सफल संचालन के लिए आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की त्वरित नियुक्ति संबंधित विभागों से की जाए। साथ ही विभिन्न जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए प्रशिक्षण प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए, ताकि आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
बैठक में 2,923 करोड़ 84 लाख रुपये लागत के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी अधोसंरचना परियोजनाएं तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरी हों। साथ ही कार्यों की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाए।
उन्होंने कहा कि सिंहस्थ से जुड़े निर्माण कार्य इस तरह किए जाएं कि वे भविष्य में भी उपयोगी बने रहें। सड़कों का विकास ऐसा हो जिससे महाकाल लोक सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक आवागमन आसान हो सके। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 किलोमीटर के दायरे में होम-स्टे, पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने क्षिप्रा नदी पर पैदल यात्रियों के लिए अलग पुल बनाने के निर्देश भी दिए। साथ ही स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने और जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने की बात कही, ताकि आयोजन में व्यापक सहयोग सुनिश्चित हो सके।
बैठक में उज्जैन के विभिन्न मार्गों के चौड़ीकरण, सीमेंट कंक्रीट सड़कों के निर्माण, नए पुल, अंडरपास और सौंदर्यीकरण से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इसके अलावा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के निर्माण को भी मंजूरी दी गई, जहां से सीसीटीवी, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स के जरिए मेले की गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।
इस केंद्र के माध्यम से एआई आधारित भीड़ प्रबंधन, मोबाइल एप के जरिए मार्ग, पार्किंग और सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही साइबर सुरक्षा, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और स्वच्छता जैसे पहलुओं पर भी निगरानी रखी जाएगी।
बैठक में कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल भी शामिल थे।











