मुंबई, 15 मई।
महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिक विस्तार और हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘स्मार्ट ग्रीन ग्रिड’ योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक नाम ‘महाराष्ट्र : एक्सेलेरेटिंग ग्रीन एनर्जी एंड स्टोरेज टेक्नोलॉजीज इंटीग्रेशन इन कनेक्टेड ग्रिड’ रखा गया है, जिसकी कुल लागत लगभग 12,303 करोड़ रुपये है और इसमें विश्व बैंक से 8,616 करोड़ रुपये का ऋण लेने को मंजूरी दी गई है।
ऊर्जा विभाग के शासन निर्णय के अनुसार यह योजना वर्ष 2026 से 2031 के बीच लागू की जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसमिशन प्रणाली को मजबूत करना, अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ना, ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करना और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
राज्य में बिजली की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और कोविड के बाद आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के कारण 8 से 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वर्तमान में राज्य की स्थापित क्षमता 52.5 गीगावॉट है जिसमें 41.6 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का है।
योजना के तहत 40 नए उपकेंद्र और ट्रांसमिशन लाइनें स्थापित की जाएंगी, साथ ही पावर ट्रांसफॉर्मर, रिएक्टर, कैपेसिटर और स्टैटिक सिंक्रोनस कंपेंसेटर की क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिससे ग्रिड की मजबूती और विश्वसनीयता में सुधार होगा।
इसके अलावा 16,000 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जाएगी और 4,000 मेगावाट बैटरी परियोजनाओं को वायबिलिटी गैप फंडिंग के साथ प्रति मेगावाट-घंटे 27 लाख रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि ऊर्जा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके।
घाटघर, कोयना, पानशेत, कोडाली, वरसगांव, मुकखेड, निवे और वरंध घाट क्षेत्रों में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए अध्ययन कार्य भी किया जाएगा, ताकि दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत किया जा सके।
इस पूरी योजना का 70 प्रतिशत वित्त पोषण विश्व बैंक ऋण से और शेष 30 प्रतिशत राज्य की बिजली कंपनियों के माध्यम से किया जाएगा, जबकि ऋण की वापसी 2031 से 2045 के बीच संबंधित कंपनियों द्वारा की जाएगी, जिससे राज्य सरकार पर प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।






.jpg)




