वाराणसी, 06 जून।
काशी में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की बैठक में शिरकत करने पहुंचे सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। दो दिवसीय मंथन के बाद विदेशी मेहमानों ने काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर ज्योर्तिलिंग के दर्शन-पूजन किए। मंदिर की भव्यता और अलौकिक दिव्यता से अभिभूत प्रतिनिधियों ने भारत की आध्यात्मिक और सनातन विरासत को बेहद करीब से महसूस किया।
मंदिर भ्रमण के दौरान मेहमानों ने बाबा विश्वनाथ के स्वर्णिम शिखर के समक्ष यादगार तस्वीरें भी खिंचवाईं। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अधिकारियों ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उन्हें स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों ने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। यह दौरा सदस्य देशों के बीच आपसी सांस्कृतिक संवाद को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ।
इससे पहले सुबह प्रतिनिधिमंडल ने भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ की यात्रा की। यहां धम्मेक स्तूप के दर्शन और परिक्रमा कर उन्होंने बौद्ध दर्शन की गहन अनुभूति प्राप्त की। इस दौरान भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार ने प्रतिनिधियों को भारतीय इतिहास और जीवंत परंपराओं से विस्तार से अवगत कराया। सारनाथ की शांति और ऐतिहासिक महत्व ने सभी को गहरे तक प्रभावित किया।
अपनी इस यात्रा के अंतिम चरण में ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने बड़ालालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर का भी रुख किया। यहां उन्होंने पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और स्थानीय कला का बारीकी से अवलोकन किया। सुरक्षा के लिहाज से पूरे आयोजन के दौरान विशेष इंतजाम किए गए थे और विभिन्न एजेंसियों की कड़ी निगरानी में पूरा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।












.jpg)


