चेन्नई, 06 जून।
तमिलनाडु के राज्य पशु नीलगिरि तहर के संरक्षण प्रयासों को बड़ी कामयाबी मिली है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी ताजा गणना रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में राज्य में इनकी आबादी में 4.68 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिससे इनकी कुल संख्या 1,364 हो गई है। यह आंकड़ा इस दुर्लभ वन्यजीव के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता और वैज्ञानिक संरक्षण नीतियों की सफलता को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मौजूद कुल नीलगिरि तहरों में से लगभग 44.87 प्रतिशत आबादी अनामलाई क्षेत्र में और 29.25 प्रतिशत नीलगिरि के परिक्षेत्रों में निवास करती है। इनकी संख्या में हुई इस वृद्धि का श्रेय सरकार द्वारा संचालित संरक्षण योजनाओं और आवासों की बेहतर सुरक्षा को दिया जा रहा है।
तमिलनाडु और केरल का वन विभाग संयुक्त रूप से 'नीलगिरि तहर परियोजना' के तहत इनके संरक्षण और नियमित निगरानी का कार्य कर रहा है, जिससे पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी तंत्र में इन्हें सुरक्षित माहौल मिल रहा है।
संख्या के सटीक आकलन के लिए इस वर्ष 24 से 27 अप्रैल के बीच 14 वन प्रभागों में तीसरी संयुक्त गणना संचालित की गई थी। इस अभियान में 43 वन क्षेत्रों के अंतर्गत 126 गश्ती मार्गों और 177 गणना इकाइयों को शामिल किया गया।
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए पहली बार 'वरुडाई' (VARUDAI) नामक एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त, गणना में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आईयूसीएन, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को तीसरे पक्ष के पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया था।
वैज्ञानिक विश्लेषण में यह बात भी सामने आई है कि ये जीव समुद्र तल से 270 मीटर से लेकर 2,630 मीटर तक की ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण इलाकों में सफलतापूर्वक अनुकूलित हैं।
गणना में नर-मादा का अनुपात 55:100 और मादा-शावकों का अनुपात 100:66 पाया गया है, जो इस प्रजाति के स्वस्थ प्रजनन और स्थिर भविष्य की ओर इशारा करता है। वन विभाग का मानना है कि अवैध शिकार पर सख्ती और आवासों की निरंतर सुरक्षा के कारण अब इन दुर्लभ वन्यजीवों की संख्या में लगातार वृद्धि की उम्मीद बनी हुई है।


















