भोपाल, 8 जून।
मध्य प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कहा है कि मतदान अधिकार लोकतंत्र की सबसे पवित्र व्यवस्था है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता इससे वंचित न रहे। साथ ही किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो और वह मतदान का अधिकार उपयोग न कर सके।
सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने नगरीय निकायों और त्रि-स्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यों की प्रगति का आकलन किया।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाए तथा इसकी लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी देने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही पुनरीक्षण कार्यों की निगरानी के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किए जाएं और डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन मॉनीटरिंग सुनिश्चित की जाए।
बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने बताया कि प्रारूप मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां 15 जून तक प्राप्त की जाएंगी। इसके बाद 25 जून तक उनका निराकरण किया जाएगा और अंतिम फोटोयुक्त मतदाता सूची का प्रकाशन 18 जुलाई को किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सहित राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।














