नई दिल्ली, 08 जून।
एक इतालवी नेतृत्व वाले शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुनिया के कई महासागरीय क्षेत्रों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन मौजूद हैं। यह अध्ययन सोमवार को रोम में आयोजित समुद्री और मानव स्वास्थ्य से जुड़े एक मंच पर प्रस्तुत किया गया।
शोध के अनुसार भूमध्य सागर, अटलांटिक, आर्कटिक सहित कई महासागरीय बेसिनों से लिए गए समुद्री जल नमूनों में इन जीनों की उपस्थिति पाई गई है। वैज्ञानिकों ने बताया कि विशेष रूप से व्यस्त शिपिंग मार्गों और अधिक जनसंख्या वाले तटीय क्षेत्रों के पास इनकी अधिक मात्रा देखी गई।
अध्ययन में यह संकेत मिला है कि महासागर भूमि से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के वैश्विक भंडार के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो मानव उपयोग से जुड़े एंटीबायोटिक अवशेषों और शहरी अपशिष्ट के आनुवंशिक निशानों को दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचा रहे हैं। शोधकर्ताओं ने आशंका जताई कि इससे दूरस्थ समुदायों में भी इन जीनों के फैलने की संभावना बढ़ सकती है।
इतालवी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (ISS) द्वारा प्रस्तुत इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि खुले समुद्र और दूरस्थ क्षेत्रों में भी माइक्रोप्लास्टिक, PFAS जैसे “फॉरएवर केमिकल्स” और SARS-CoV-2 के आनुवंशिक अंश मौजूद हैं।
ISS के महानिदेशक एंड्रिया पिचिओली ने कहा कि आज मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए समुद्र और महासागरों की रक्षा अनिवार्य है, क्योंकि प्रदूषक जल, भोजन और जलवायु प्रणालियों के माध्यम से वैश्विक रूप से फैलते हैं।
SeA Care नामक इस परियोजना को एक वैश्विक महासागर निगरानी प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें इतालवी नौसेना और कई अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान शामिल हैं। परियोजना में मौजूदा नौसैनिक मार्गों और वैज्ञानिक नेटवर्क के माध्यम से नियमित अभियानों के दौरान नमूने एकत्र किए जाते हैं, जिससे लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों कम होते हैं।
पहले तीन वर्षों में 140 से अधिक स्थानों से 4,000 से अधिक समुद्री जल नमूने एकत्र किए गए हैं, जो वैज्ञानिकों के अनुसार महासागरों को वैश्विक स्वास्थ्य जोखिमों की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।














