नई दिल्ली, 08 जून ।
दिल्ली में आयोजित दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की बैठक में मानसून से जुड़ी तैयारियों, आपदा प्रबंधन व्यवस्था और राजधानी में सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें बाढ़ और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए।
बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने की, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद, प्रवेश साहिब सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही कार्रवाई, फायर सेफ्टी लाइसेंस के कथित दुरुपयोग और भविष्य में आपदा जोखिम कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही बढ़ते शहरीकरण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों के पालन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में आपदा जोखिम को केवल चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
फायर सेफ्टी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली अग्निशमन सेवा में रिक्त पदों को भरने पर भी विचार हुआ तथा पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति की संभावना का अध्ययन करने का सुझाव दिया गया, ताकि प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग बढ़ाया जा सके।
बैठक में विभिन्न विभागीय टीमों को निर्देश दिया गया कि वे तय समयसीमा के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करें, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
इसके अलावा हीटवेव, गर्मी से जुड़ी आपदाओं और मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बारिश के दौरान संभावित जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए सभी विभाग पूरी सतर्कता बरतें और किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।














