नई दिल्ली, 08 जून ।
पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच फिर से बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.42 डॉलर यानी 4.47 प्रतिशत बढ़कर 97.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड 4.07 डॉलर यानी 4.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ते तनाव ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संभावित लंबे समय तक बंद रहने की आशंका को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान और इजरायल के बीच हालिया हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता और गहरी हो गई है, जबकि कुछ समय पहले शांति वार्ता की उम्मीदों के चलते तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती दौर में तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जिससे ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव पड़ा था।
इस बीच ओपेक+ ने जुलाई में उत्पादन बढ़ाकर 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन करने का निर्णय लिया है, हालांकि कई सदस्य देश पहले से ही उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे अमेरिका सहित कई देशों में उपभोक्ता खर्च और आर्थिक दबाव प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में राहत में और देरी हो सकती है।














