जैसे ही राजनीतिक बाजी सत्ता पक्ष के पक्ष में गई, सफलता की फसल काटने के लिए कई चेहरे दरांती लेकर मैदान में उतर आए। हर कोई बता रहा है कि असली रणनीतिकार वही था। जबकि जानकार कहते हैं कि इतिहास कुछ और लिख रहा है।
जरूरत से ज्यादा विधायक होने के बावजूद विपक्ष को उसी के घर में मात देना कोई मामूली खेल नहीं था। अब विपक्ष हार से कम और अपने ही अंकगणित से ज्यादा परेशान है।










