सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के एक फैसले ने विरोधियों को भी हैरत में डाल दिया। चर्चा यह है कि जिस कार्यकर्ता को कभी मंच पर पीछे जगह मिलती थी, आज वही सुर्खियों के केंद्र में है।
बुंदेलखंड की मिट्टी से निकले उस साधारण कार्यकर्ता को मिला सम्मान कई लोगों को यह याद दिला गया कि राजनीति में कभी-कभी गणित नहीं, नेतृत्व का मन भी चलता है। और यही बात कई अनुभवी चेहरों की नींद उड़ाए हुए है।










