बेंगलुरु, 25 जून।
भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता को बड़ी मजबूती मिली है। स्वदेशी ‘नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली को फुल ऑपरेशनल क्लियरेंस (एफओसी) प्रदान कर दिया गया है। इसके साथ ही वायुसेना अब हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र प्रबंधन और दुश्मन की गतिविधियों पर पहले से अधिक प्रभावी ढंग से नजर रख सकेगी। इसे देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
डीआरडीओ द्वारा विकसित इस स्वदेशी प्रणाली का प्रमाणपत्र 25 जून को बेंगलुरु में आयोजित समारोह में भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की उपस्थिति में सौंपा गया। इससे पहले वर्ष 2017 में इस प्रणाली को प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (आईओसी) मिली थी। अब पूर्ण परिचालन स्वीकृति मिलने के बाद इसका उपयोग पूरी क्षमता के साथ किया जा सकेगा।
‘नेत्र’ एक आधुनिक हवाई निगरानी प्रणाली है, जिसे विशेष विमान पर स्थापित किया जाता है। यह उड़ान के दौरान सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है। इसके माध्यम से दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और अन्य संभावित खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली भारतीय वायुसेना के लिए आंख और कान की तरह कार्य करती है तथा वास्तविक समय में कमांड सेंटर तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाती है।
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बताया कि ‘नेत्र’ ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता साबित की है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक होने के कारण बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप इसमें आवश्यक सुधार और उन्नयन भी आसानी से किए जा सकते हैं।
इस परियोजना को डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार विकास के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन बेहतर योजना, उन्नत सिस्टम इंजीनियरिंग और व्यापक उड़ान परीक्षणों की बदौलत इसे सफलतापूर्वक परिचालन सेवा के लिए तैयार किया गया।
‘नेत्र’ को पूर्ण परिचालन स्वीकृति मिलना भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि उन्नत एयरोस्पेस एवं रक्षा प्रणालियों के विकास में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। साथ ही यह वैज्ञानिक संस्थानों, सैन्य बलों और रक्षा उद्योगों के बीच प्रभावी समन्वय का भी उदाहरण है, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई मजबूती प्रदान करता है।
















