नई दिल्ली, 01 जुलाई।
देश की आर्थिक दिशा को बदलने वाला वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आज अपने नौ वर्ष पूरे कर चुका है। 1 जुलाई 2017 को शुरू हुई यह कर सुधार प्रणाली अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विकास का एक सशक्त आधार बन गई है। इसने जटिल अप्रत्यक्ष करों के जाल को खत्म कर 'एक राष्ट्र, एक कर' के सपने को साकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी न केवल बाजार के लिए फायदेमंद है बल्कि यह डिजिटल प्रशासन की मजबूती का भी प्रतीक है। पहले जहां कई तरह के करों के कारण उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती थी, अब सरल नियमों के चलते व्यापारी देश के किसी भी कोने में आसानी से अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं।
इस कर सुधार ने देश के लघु उद्योग और एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान की है। सरकार ने जीएसटी पंजीकरण सीमा को बढ़ाने और छोटे कारोबारियों के लिए सरल रिटर्न फाइलिंग की सुविधा देकर उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। आज करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर 1.65 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
डिजिटल क्रांति को गति देते हुए जीएसटी नेटवर्क ने कर भुगतान और इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भारी कमी आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी संग्रह में हुई बढ़ोतरी देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।
हालांकि कुछ छोटे उद्यमियों के सामने अब भी चुनौतियों के सवाल बने हुए हैं, जिन पर भविष्य में नीतिगत निर्णयों की अपेक्षा की जा रही है। वर्ष 2025 में लागू जीएसटी 2.0 ने कर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाया है, जिससे आम उपभोक्ता और उद्योग जगत दोनों को लाभ मिल रहा है। यह कर सुधार अब भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।




















