नई दिल्ली, 1 जुलाई।
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखा है। इस पहल में भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती व मनोज झा और पाकिस्तान से खुर्शीद महमूद कसूरी जैसे दिग्गज शामिल हैं। इनका मानना है कि संवाद का रास्ता खोलने से ही दक्षिण एशिया में शांति और खुशहाली संभव है।
इस पत्र में 11 प्रमुख सुझाव दिए गए हैं, जिनमें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत की बहाली, सैन्य तनाव में कमी, व्यापार को दोबारा शुरू करना और वीजा नियमों में ढील देना शामिल है। इसके अलावा सांस्कृतिक जुड़ाव, खेलों की सीरीज, और अटारी-वाघा बॉर्डर समेत बस व हवाई सेवाओं को फिर से खोलने की वकालत की गई है। पिछले कुछ वर्षों में पठानकोट हमले, अनुच्छेद 370 के घटनाक्रम और सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों मुल्कों के बीच कूटनीतिक खाई को गहरा कर दिया है।
इस मांग पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता रविंदर रैना ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार को किसी पत्र की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारत पड़ोसियों से अच्छे संबंध का पक्षधर रहा है। उन्होंने आतंकवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक सीमा पार से दुस्साहस बंद नहीं होगा, तब तक बातचीत संभव नहीं है। रैना ने इन हस्तियों से सवाल किया कि क्या वे पाकिस्तान के भविष्य के व्यवहार की गारंटी ले सकते हैं।
इस बीच, अन्य चर्चाओं में RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात कही है। वहीं, सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की ओर से दी गई धमकियों और बैकचैनल मीटिंग्स की अटकलों ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। फिलहाल दोनों देशों के नागरिक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।




















