पिछले दिनों सियासत के एक बड़े धुरंधर ने ऐसा तीर छोड़ा कि धनुष किस ओर था, यह कोई नहीं समझ पाया, लेकिन तीर किसे लगा, यह हर कोई जान गया। बयान में किसी का नाम नहीं था, फिर भी कई चेहरे अचानक गंभीर हो गए।
कुछ सफाई देने में जुट गए, तो कुछ खामोशी की चादर ओढ़कर बैठ गए। अब राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि तीर चलाने वाले का निशाना कभी खाली नहीं जाता।



















