पूर्व क्षत्रप का आयोजन निजी था, लेकिन उसमें मौजूद भीड़ और चेहरों ने उसे सार्वजनिक बना दिया। मंच पर सादगी दिखाई दी और कुर्सियों पर वजनदारी।
अब लोग यही हिसाब लगा रहे हैं कि आखिर संदेश सादगी का था या शक्ति प्रदर्शन का। राजनीति में कई बार खामोशी भी सबसे बड़ा भाषण बन जाती है।



















