तबादलों की सूची आई तो कई स्थानीय माननीयों की भौंहें भी चढ़ गईं। उनका कहना है कि जिले में वे जनता के प्रतिनिधि हैं, लेकिन फैसले कहीं और हो रहे हैं।
कुछ ने अपनी पीड़ा ऊपर तक पहुंचा दी है। चर्चा है कि अफसर अब आदेश से ज्यादा इशारों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में समन्वय की जगह असंतोष बढ़े, तो किसी को हैरानी नहीं होगी।



















