हिसार, 6 जुलाई।
हरियाणा में एक नवजात शिशु की दर्दनाक मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। वेंटिलेटर की सुविधा न मिलने के कारण बच्चे की जान जाने की खबर का मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
बताया जा रहा है कि एक जुलाई को बच्चे का जन्म हुआ था। जन्म के तुरंत बाद ही उसे वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता थी। हिसार के सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर न होने के कारण उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
वहां भी मशीन खाली न होने पर उसे रोहतक के पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश वहां भी बच्चे को यह सुविधा नहीं मिल सकी। अंततः उसे वापस हिसार के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम में 24 घंटे का लंबा समय बीत गया, लेकिन कहीं भी जीवन रक्षक प्रणाली उपलब्ध नहीं हो सकी। अब इस पर आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
आयोग की इस सख्ती से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की पोल खुल गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों में एक मासूम को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा।



















