संपादकीय
06 Jul, 2026

ठगी का कॉल सेंटर: वेट लॉस के नाम पर करोड़ों की लूट

गुरुग्राम में संचालित फर्जी कॉल सेंटर के जरिए वजन घटाने की नकली दवाओं के नाम पर महिलाओं से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ।

गुरुग्राम, 6 जुलाई।

यह मामला हमारी डिजिटल समझ और लालच, दोनों पर सवाल खड़े करता है। वजन घटाने की नकली दवाओं के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, हरियाणा के गुरुग्राम में 'क्यूरेट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से एक फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। यहाँ से फेसबुक पर वजन घटाने के विज्ञापनों के माध्यम से देशभर की महिलाओं को निशाना बनाया जाता था। इस कॉल सेंटर में करीब 150 युवतियां खुद को हेल्थ एक्सपर्ट, डाइटीशियन या ब्यूटी कंसल्टेंट बताकर महिलाओं से संपर्क करती थीं, जबकि लगभग 20 युवक डॉक्टर बनकर मेडिकल सलाह देते थे।

सोशल मीडिया पर वजन घटाने से जुड़े आकर्षक विज्ञापन डाले जाते थे। इनमें रुचि दिखाने वाली महिलाएं अपना मोबाइल नंबर दर्ज करती थीं, जिसके बाद कॉल सेंटर की टीम उनसे संपर्क करती थी। पहले चरण में महिलाओं को भरोसे में लिया जाता, फिर वजन घटाने की दवा खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता। शुरुआत में दो हजार से पांच हजार रुपये की दवा भेजी जाती। जब महिला को कोई फायदा नहीं होता, तो दोबारा कॉल कर कहा जाता कि शरीर में टॉक्सिन है, इसलिए पहले डिटॉक्स कोर्स करना पड़ेगा, जिसकी कीमत 20 हजार से 50 हजार रुपये बताई जाती। इसके बाद लिवर, किडनी डिटॉक्स और वेट लॉस गारंटी कोर्स के नाम पर लाखों रुपये ऐंठे जाते थे। पुलिस के अनुसार, यह कंपनी हर महीने करीब दो करोड़ रुपये की कमाई कर रही थी। कई महिलाओं से लाखों रुपये वसूले गए। एक महिला की शिकायत के अनुसार, उससे वेट लॉस के नाम पर 77 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है और बताता है कि ठगी का जाल कितना गहरा है।

पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पहला, 26 वर्षीय मोहम्मद हुसैन, जो फर्जी नाम से काम करता था और कूरियर बॉय बनकर नकली दवाओं की डिलीवरी करता था। दूसरी, 21 वर्षीय हेना विमलेश मंडल, जो तन्वी शर्मा बनकर महिलाओं को फोन करती थी और दवा खरीदने के लिए भरोसा दिलाती थी। तीसरी, 22 वर्षीय निशा कुमारी दयानंद भारती, जो प्रिया गुप्ता के नाम से कॉल कर महिलाओं को दवा खरीदने और नकद रकम तैयार रखने के लिए प्रेरित करती थी। इनके अलावा 150 से अधिक युवतियां और 20 युवक इस रैकेट में शामिल थे, जो खुद को डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट बताकर देशभर की हजारों महिलाओं को ठग रहे थे।

वजन बढ़ना आज हर दूसरी महिला की समस्या है। शादी, गर्भावस्था या बढ़ती उम्र के साथ वजन बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन समाज का दबाव रहता है कि पतली और आकर्षक दिखना जरूरी है। यही कमजोरी ठगों का सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पहले और बाद की फर्जी तस्वीरें दिखाकर भरोसा जीता जाता है, फिर डर पैदा किया जाता है कि मोटापे से शुगर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। महिला घबरा जाती है और पैसे भेज देती है। कई बार परिवार को बताए बिना ही भुगतान कर देती है ताकि ताने न सुनने पड़ें। ठग इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं।

सवाल यह है कि गुरुग्राम जैसे शहर में इतना बड़ा कॉल सेंटर महीनों तक चलता रहा, तो स्थानीय पुलिस और साइबर सेल क्या कर रही थी? क्या किसी ने लाइसेंस की जांच नहीं की? क्या ड्रग कंट्रोल विभाग ने कभी यह नहीं देखा कि ये दवाएं कौन बना रहा है और किस अनुमति से बेची जा रही हैं? सच यह है कि देश में हजारों फर्जी कॉल सेंटर लोन, इंश्योरेंस और नौकरी के नाम पर ठगी कर रहे हैं, लेकिन हेल्थ के नाम पर होने वाली ठगी सबसे खतरनाक है, क्योंकि इसमें पैसे के साथ सेहत भी दांव पर लग जाती है।

किसी भी दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के न खरीदें, खासकर ऑनलाइन विज्ञापन देखकर तो बिल्कुल नहीं। वजन घटाने की कोई जादुई गोली नहीं होती। जो सात दिन में 10 किलो वजन घटाने का दावा करे, वह लगभग निश्चित रूप से धोखाधड़ी है। अगर कोई खुद को डॉक्टर बताए तो उसका रजिस्ट्रेशन नंबर मांगें और उसे संबंधित रिकॉर्ड में जांचें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपनी मेडिकल हिस्ट्री साझा करें। यदि ठगी हो जाए तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी थाने में एफआईआर कराएं।

हमें यह भी समझना होगा कि मोटापे को लेकर समाज का नजरिया बदलना जरूरी है। हर महिला का जीरो फिगर होना न संभव है और न ही जरूरी। जरूरी है स्वस्थ रहना, और उसके लिए संतुलित आहार तथा नियमित व्यायाम ही सही रास्ता है, न कि नकली दवाएं। परिवार को भी महिलाओं पर पतला दिखने का अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यही दबाव उन्हें ठगों के जाल में फंसा देता है।

गुरुग्राम का यह फर्जी कॉल सेंटर सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि उस बीमारी का लक्षण है जो डिजिटल इंडिया के साथ फैल रही है। जहाँ लालच है, वहाँ ठग हैं और जहाँ डर है, वहाँ लूट है। सरकार को चाहिए कि साइबर ठगी के मामलों के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए और ऐसी कंपनियों के संचालकों पर कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों की भी जवाबदेही तय हो कि वे बिना पर्याप्त सत्यापन के हेल्थ प्रोडक्ट के विज्ञापन क्यों चलने देती हैं। जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, तब तक ठगी का यह कारोबार बंद नहीं होगा। याद रखिए, आपकी सेहत की कीमत करोड़ों में है, लेकिन उसे लूटने वाले दो रुपये की नकली दवा बेचते हैं। इसलिए सावधान रहिए, सतर्क रहिए और दूसरों को भी जागरूक कीजिए, क्योंकि ठगी का यह वायरस एक से दूसरे तक फैलता है और इसका सबसे बड़ा इलाज जागरूकता है।

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