जोधपुर, 06 जुलाई।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने माध्यमिक शिक्षा विभाग की एक विशेष अपील को खारिज कर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को चयनित वेतनमान का लाभ उसी तिथि से मिलना चाहिए, जिस दिन से उनकी सेवाएं नियमित हुई हैं, भले ही इसका आधिकारिक आदेश बाद के वर्षों में जारी किया गया हो।
यह मामला बीकानेर निवासी वरिष्ठ अध्यापक गुमानाराम और उप प्रधानाचार्य सोहनलाल से जुड़ा है। विभाग ने उन्हें नियमितिकरण आदेश जारी होने की तारीख से वेतनमान का लाभ देना शुरू कर दिया था। हालांकि, उनके नियुक्ति पत्र में स्पष्ट था कि उनका नियमितिकरण भूतलक्षी प्रभाव से किया गया है।
अधिवक्ता के अनुसार, इन शिक्षकों का स्थायिकरण वर्ष 1988 में उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से प्रभावी था, लेकिन विभाग ने 1995 में आदेश जारी किए। पूर्व में मिले लाभ को बाद में विभाग द्वारा संशोधित करने को शिक्षकों ने न्यायालय में चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अधिकरण और एकलपीठ के फैसलों को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि आदेश जारी करने की तारीख महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वह तारीख अहम है जिससे नियमितिकरण प्रभावी माना गया है। अतः लाभ में संशोधन करना विधि विरुद्ध है।



















