जयपुर, 06 जुलाई।
राजस्थान पुलिस की एसओजी ने फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट मामले में एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद आरोपित भारत में अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर सका था। इसके बाद उसने कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर धौलपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप शुरू कर दी थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपित की पहचान डीग जिले के गोपालगढ़ निवासी 27 वर्षीय चरण सिंह के रूप में हुई है। मामले में दर्ज प्रकरण के तहत धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में असफल रहने वाले अभ्यर्थियों को कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में उनका प्रोविजनल पंजीकरण कराया गया और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप शुरू कराई गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि चरण सिंह ने वर्ष 2017 से 2022 के बीच कजाकिस्तान के अल्माटी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद वह कई बार एफएमजी परीक्षा में सफल नहीं हो सका। पुलिस के अनुसार, उसने अपने एक साथी के माध्यम से 24 लाख रुपये देकर कथित रूप से फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। उसी साथी ने भी कथित तौर पर ऐसे ही प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप और प्रोविजनल पंजीकरण कराया था।
पुलिस का कहना है कि अब तक इस मामले में 100 से अधिक संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है और 29 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें फर्जी डॉक्टरों के अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारी, मुख्य आरोपित और एक दलाल भी शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र और पंजीकरण के लिए प्रति अभ्यर्थी 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।



















