संपादकीय
17 Jul, 2026

स्कूलों में अब 20 मिनट की क्लास: बच्चों को दी जाएगी यौन शिक्षा और सुरक्षा की जानकारी

नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में शुरू होने वाली साप्ताहिक 20 मिनट की विशेष कक्षा के माध्यम से बच्चों को सुरक्षा, जागरूकता, सम्मान और यौन शोषण से बचाव की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।

नई दिल्ली, 17 जुलाई।

देश में बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। नई शिक्षा नीति के तहत अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन को शामिल किया जाएगा। इसके तहत हर सप्ताह 20 मिनट की विशेष कक्षा लगाई जाएगी, जिसमें बच्चों को शरीर में होने वाले बदलाव, सुरक्षित व्यवहार और सही-गलत की पहचान के बारे में जानकारी दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को यौन शोषण, गुड टच-बैड टच और साइबर सुरक्षा के बारे में पढ़ाया जाए। कोर्ट का मानना है कि जब तक बच्चों को सही जानकारी नहीं दी जाएगी, तब तक उनके साथ होने वाले अपराधों को रोकना मुश्किल होगा।

यह कक्षा सप्ताह में एक बार आयोजित होगी। इसमें उम्र के अनुसार बच्चों को जानकारी दी जाएगी। छोटे बच्चों को शरीर के अंगों के सही नाम, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की पहचान तथा किसी के गलत व्यवहार करने पर किससे मदद मांगनी है, यह बताया जाएगा। बड़े बच्चों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव, आपसी सम्मान, रिश्तों की मर्यादा, साइबर बुलिंग और यौन शोषण से बचाव के तरीके सिखाए जाएंगे। पाठ्यक्रम में यह भी शामिल होगा कि यदि किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार होता है तो वह चुप न रहे और अपने माता-पिता, शिक्षक या हेल्पलाइन से मदद ले।

केंद्र सरकार का कहना है कि आज के समय में बच्चे सोशल मीडिया और इंटरनेट के कारण बहुत जल्दी विभिन्न जानकारियों तक पहुंच जाते हैं। यदि उन्हें सही और वैज्ञानिक जानकारी स्कूल में नहीं मिलेगी तो वे गलत स्रोतों से भ्रमित हो सकते हैं। यौन शिक्षा का अर्थ अश्लीलता नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों को अपने शरीर के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें शोषण से बचाना है। पॉक्सो एक्ट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बाद इसकी आवश्यकता और अधिक महसूस की गई है। कई मामलों में देखा गया है कि बच्चों को यह तक पता नहीं होता कि उनके साथ जो हुआ, वह गलत था।

कई अभिभावक इस फैसले को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि कम उम्र में ऐसी जानकारी देने से बच्चे भटक सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जानकारी उम्र के अनुसार और वैज्ञानिक तरीके से दी जाएगी। इसमें किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बनाना होगा। शिक्षकों को भी इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे इस विषय को संवेदनशीलता के साथ पढ़ा सकें। स्कूलों में काउंसलर की नियुक्ति और अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि देश में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले हर वर्ष बढ़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश मामले परिचित लोगों द्वारा किए जाते हैं। यदि बच्चा शुरू से ही सही और गलत की पहचान करना सीख जाएगा, तो वह अपने बचाव के लिए आवाज उठा सकेगा। यह कक्षा बच्चों में आपसी सम्मान और समानता की भावना भी विकसित करेगी। लड़के और लड़कियों, दोनों को यह समझाया जाएगा कि किसी का भी शरीर उसका निजी अधिकार है और उसका सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।

स्कूलों में 20 मिनट की यह कक्षा केवल एक विषय नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानकारी से डर कम होता है और जागरूकता से अपराधों की रोकथाम संभव होती है। सरकार, अभिभावक और शिक्षक यदि मिलकर इस पहल को सफल बनाएं, तो हर बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करेगा और बिना डर के खुलकर जीवन जी सकेगा।

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