कटनी, 17 जुलाई।
विंध्य और महाकौशल की जीवनरेखा मानी जाने वाली स्लीमनाबाद जल-सुरंग का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शुक्रवार को कटनी पहुंचकर इस देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल जल-परियोजना का निरीक्षण करेंगे। यह 12 किलोमीटर लंबी सुरंग नर्मदा के जल को ग्रेविटी के माध्यम से सोन नदी के कछार तक पहुँचाने वाली एक अद्भुत इंजीनियरिंग उपलब्धि है, जिससे जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष लगाव रहा है। उन्होंने इसे न केवल एक ढांचा माना है, बल्कि इसे पौराणिक महत्व देते हुए विंध्य की प्यास बुझाने वाला 'महासेतु' कहा है। अमरकंटक से अलग दिशाओं में बहने वाली माँ नर्मदा और सोनभद्र के पौराणिक विरह को मिटाने के उद्देश्य से शुरू हुई इस टनल को मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत समीक्षाओं और त्वरित निर्णयों के जरिए एक नई गति प्रदान की है। अब इस 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम मात्र एक मीटर के अंतिम 'ब्रेक-थ्रू' पर आकर रुक गया है।

तकनीकी मोर्चे पर यह कार्य किसी चुनौती से कम नहीं था। विंध्य की 40 मीटर ऊँची रिज लाइन को भेदने में इंजीनियरों को पत्थर की कठोरता, भारी जल-रिसाव और विशाल भूमिगत गुफाओं जैसी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। एक समय जब विदेशी मशीनें जवाब दे गईं, तब मुख्यमंत्री के दृढ़ निश्चय ने अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट तकनीक और विशेष ग्राउटिंग प्रक्रिया के माध्यम से इस कठिन लक्ष्य को प्राप्त करना संभव कर दिखाया।
यह विशाल सिंचाई परियोजना देश का पहला ऐसा उदाहरण होगी जहां 10.14 मीटर व्यास की टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा जल पूरी तरह प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण के सहारे प्रवाहित होगा। परियोजना के पूर्ण होते ही कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के हजारों गांवों को स्थायी पानी मिलेगा। राज्य सरकार ने मार्च 2026 तक सिंचाई क्षमता का लाभ देने का लक्ष्य रखा है और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जल-सुविधा सुनिश्चित करने का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है।












