ब्रसेल्स, 17 जुलाई।
यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान में मानवाधिकार की गिरती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। संघ ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को 2027 से लागू होने वाले नए जीएसपी ढांचे के तहत मिलने वाले व्यापारिक लाभ तभी बरकरार रहेंगे, जब वह अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सख्ती से पालन करेगा।
यूरोपीय आयोग की 2023-2025 अवधि की संयुक्त निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपने जीएसपी+ समझौतों को निभाने में विफल रहा है। मूल्यांकन में कई क्षेत्रों में स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में कानून के शासन और नागरिक समाज के लिए सिकुड़ते स्थान पर सवाल उठाए गए हैं। पाकिस्तान में जबरन लापता होने के मामलों और बिना न्यायिक प्रक्रिया के हत्याओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इन अपराधों के लिए जवाबदेही का अभाव भी एक बड़ी समस्या है।
साइबर अपराध, आतंकवाद विरोधी और ईशनिंदा कानूनों में हालिया संशोधनों के कारण वहां अभिव्यक्ति की आजादी काफी प्रभावित हुई है। साथ ही, संवैधानिक बदलावों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को और कमजोर कर दिया है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं।
बालोचिस्तान और पंजाब में आतंकवाद विरोधी कानूनों के नए प्रावधान मनमानी गिरफ्तारी को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा, अल्पसंख्यक समुदायों के साथ भेदभाव, उन पर हमले और उनके पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं निरंतर जारी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान का कानूनी ढांचा धार्मिक, जातीय और भाषाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में अक्षम है। घृणा अपराधों के दोषियों पर कार्रवाई न होने से पीड़ित वर्ग में भय का माहौल बना हुआ है।












