कन्याकुमारी, 17 जुलाई।
नागरकोविल जिला जेल में सबरी वर्मन की संदिग्ध मौत के बाद से उपजा विवाद और गहरा गया है। शुक्रवार को राज्य के दो मंत्रियों ने पीड़ित परिवार से मिलकर सरकारी मुआवजा, जमीन और नौकरी का प्रस्ताव रखा, लेकिन परिजनों ने इन सभी पेशकशों को सिरे से ठुकरा दिया है। वे मामले की सीबीआई जांच की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
दिव्यांग सबरी वर्मन को पान मसाला बेचने के मामले में हिरासत में लिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 19 जगह चोटों के निशान पाए गए हैं, जिससे परिवार ने जेल प्रशासन पर मारपीट और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का साफ कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए, न कि केवल आर्थिक सहायता।
परिवार पिछले पांच दिनों से शव लेने से इनकार कर धरने पर बैठा है। उनकी मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और मौत के कारणों की सच्चाई सामने आए। नेताओं के समझाने के बावजूद परिजन अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
इस मामले में मानवाधिकार संगठनों के वकील भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। वकीलों का तर्क है कि शरीर पर इतनी चोटें होने के बाद भी मृत्यु का कारण इन्हें न बताना संदेह पैदा करता है।
हालांकि राज्य सरकार ने तीन सुरक्षा प्रहरियों और आठ कैदियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन परिवार का आंदोलन अभी भी जारी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे राज्य की नजरें इस पर टिकी हैं और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठ रहे हैं।













