रांची, 17 जुलाई।
रांची जिले के नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और राजस्व रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों के मामले में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) प्रारंभिक जांच करेगा। राज्य के कैबिनेट सचिव की ओर से प्रारंभिक जांच की अनुमति दिए जाने की जानकारी झारखंड सरकार ने गुरुवार को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की।
झारखंड उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने एसीबी को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू कर उसकी प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष पेश करे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तिथि भी तय की है।
सुनवाई के दौरान एसीबी का पक्ष वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने रखा। वहीं, याचिकाकर्ता थॉमस साइमन की ओर से अधिवक्ता जे.जे. सांगा ने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
इससे पूर्व हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने कैबिनेट सचिव को निर्देश दिया था कि एक सप्ताह के भीतर एसीबी को प्रारंभिक जांच की अनुमति उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित समयसीमा में अनुमति नहीं दी गई तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही इस संबंध में कैबिनेट सचिव को शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र स्थित विवादित भूमि के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुईं। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच के लिए जरूरी मूल राजस्व अभिलेख कई बार मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया।
पिछली सुनवाई में न्यायालय के सामने यह तथ्य भी आया था कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्ष के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में लगातार देरी कर रहा था। यह स्थिति तब बनी रही, जब न्यायालय पहले ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का स्पष्ट आदेश दे चुका था। आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी भी व्यक्त की थी।
प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़ और अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए उच्च न्यायालय ने मामले की जांच एसीबी को सौंपने का निर्णय लिया। अब प्रारंभिक जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड के गायब होने, म्यूटेशन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और इसमें जुड़े अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से पड़ताल की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद एसीबी अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई, नियमित प्राथमिकी दर्ज करने और अन्य आवश्यक निर्देश जारी करने पर फैसला लेगी।













