न्यायपालिका
17 Jul, 2026

जंतर-मंतर निगरानी मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट करेगा सुनवाई

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की कथित कैमरा निगरानी के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई स्वीकार करते हुए 20 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

नई दिल्ली, 17 जुलाई।

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से कैमरों के जरिए लगातार निगरानी किए जाने के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने सहमति दे दी है। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की ओर से दायर याचिका पर अब 20 जुलाई को सुनवाई होगी। गुरुवार को वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख कर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई की तारीख तय कर दी।

अधिवक्ता सुभाष चंद्रन और अनिरुद्ध केपी के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल लोगों की दिल्ली पुलिस स्थायी निगरानी कैमरों के जरिए लगातार रिकॉर्डिंग कर रही है। याचिका के अनुसार यह निगरानी दिन-रात जारी रहती है और महिलाओं तथा युवतियों के विश्राम के समय भी कैमरे चालू रहते हैं। इसमें दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों की इस तरह लगातार निगरानी करने का कोई वैधानिक अधिकार पुलिस के पास नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि आइशी घोष 20 जून से इस प्रदर्शन का हिस्सा बनी हुई हैं। आरोप लगाया गया है कि पुलिस केवल प्रदर्शन स्थल की गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां मौजूद लोगों के भोजन करने और आराम करने के समय की भी वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ छात्र प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों ने यह कहकर डराया कि उनके फोटो और वीडियो उनके अभिभावकों तथा शैक्षणिक संस्थानों को भेज दिए जाएंगे। इससे कई लोग प्रदर्शन में शामिल होने से बच रहे हैं।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि भारी बारिश के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों की वीडियो रिकॉर्डिंग उस समय भी की गई, जब उनके पास सुरक्षित स्थान पर जाने का कोई विकल्प नहीं था। इसे महिलाओं की निजता और गरिमा का गंभीर उल्लंघन बताया गया है। याचिका के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने कई बार पुलिस से यह जानना चाहा कि इस प्रकार की निरंतर निगरानी किस कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

याचिका में निजता के अधिकार से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस केएस पुट्टास्वामी मामले के फैसले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस प्रकार की निगरानी संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। अब इस पूरे मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय 20 जुलाई को विस्तृत सुनवाई करेगा।

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