भोपाल, 17 जुलाई।
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित विज्ञान भवन में 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो)' और 'किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम' के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के सभी 55 जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्षों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में रेडक्रॉस सोसाइटी के महासचिव रमेंद्र सिंह, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी तथा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश में बाल संरक्षण तंत्र को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जवाबदेह बनाना था। इस दौरान विभिन्न जिलों के अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा किया गया, ताकि बाल कल्याण से जुड़े मामलों के निस्तारण में एकरूपता, कानूनी शुद्धता और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित की जा सके।
प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों ने पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के कानूनी एवं व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बाल संरक्षण से जुड़े वैधानिक प्रावधानों, जांच प्रक्रिया, बाल हितों की सुरक्षा, संकटग्रस्त और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, केस प्रबंधन, बाल देखभाल संस्थाओं के समन्वय, अभिलेख संधारण और आयोग की रिपोर्टिंग व्यवस्था से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम और पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय दिलाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही कानूनी कार्रवाई के अलावा बच्चों को मनोसामाजिक सहयोग और समग्र पुनर्वास उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम बाल अधिकारों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता तथा संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूती मिलेगी। कार्यशाला में न्यायपालिका, विभिन्न शासकीय विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।













