संपादकीय
17 Jul, 2026

डिजिटल ठगी का जाल: देशभर में दो साल में हजारों करोड़ का चूना, मीठी आवाज से बना रहे साइबर अपराधी शिकार

देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच ठग अब तकनीक के साथ भरोसे, भावनाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिससे सतर्कता और जागरूकता पहले से अधिक जरूरी हो गई है।

नई दिल्ली, 17 जुलाई।

मोबाइल की एक घंटी और मीठी आवाज। इसके बाद खाली हो जाता है बैंक खाता। देशभर में पिछले दो वर्षों में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़े हैं। पुलिस और साइबर सेल के आंकड़े बताते हैं कि 2024 से 2026 तक डिजिटल फ्रॉड के लाखों मामले दर्ज हुए हैं और इनमें हजारों करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। सबसे खतरनाक बात यह है कि अब ठग केवल तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि लोगों की भावनाओं और भरोसे को भी हथियार बना रहे हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठगी के तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। पहले ठग बैंक अधिकारी बनकर ओटीपी मांगते थे, लेकिन अब वे सोशल मीडिया पर दोस्ती करते हैं, प्रेमजाल में फंसाते हैं और फिर निवेश के नाम पर लाखों रुपये ठग लेते हैं। देश के कई हिस्सों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर विदेशी नागरिक बनकर युवाओं और महिलाओं से दोस्ती की गई। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाई गई और फिर विदेश से महंगा उपहार भेजने या कारोबार में साझेदारी के नाम पर कस्टम क्लीयरेंस और टैक्स का हवाला देकर लाखों रुपये ठग लिए गए। शिकायत करने पर पता चला कि सभी खाते फर्जी थे और गिरोह विदेशों से संचालित हो रहे थे।

इसी तरह कई मामलों में ठगों ने खुद को सेना का अधिकारी, डॉक्टर, बड़ा कारोबारी या सरकारी अधिकारी बताया। मीठी बातों से भरोसा जीता और फिर क्रिप्टोकरेंसी, शेयर ट्रेडिंग या विदेशी लॉटरी के नाम पर लोगों को ठग लिया। गृह मंत्रालय और एनसीआरबी के अनुसार देश में प्रतिदिन औसतन 7,000 से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हो रही हैं। पिछले दो वर्षों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी हुई है। इसमें ठग खुद को सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।

फर्जी निवेश के लिए व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर समूह बनाकर शेयर बाजार और क्रिप्टो में भारी मुनाफे का झांसा दिया जाता है। शुरुआत में छोटा लाभ दिखाकर भरोसा जीता जाता है, फिर बड़ी रकम निवेश कराई जाती है और पैसा मिलते ही समूह बंद कर दिया जाता है। गूगल पर बैंक, पेटीएम या बिजली विभाग के फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर भी ठगी की जा रही है। ग्राहक मदद के लिए कॉल करता है और ठग रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंक खाता खाली कर देते हैं। इसी प्रकार पार्ट टाइम नौकरी और टास्क के नाम पर युवाओं को पहले छोटी रकम देकर विश्वास दिलाया जाता है, फिर बड़ी राशि जमा कराकर संपर्क तोड़ दिया जाता है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अब ठग पढ़े-लिखे और जागरूक लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। ठगी के शिकार लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं की है। महिलाएं सोशल मीडिया पर दोस्ती और निवेश के जाल में फंस रही हैं। सेवानिवृत्त लोग पेंशन, मेडिकल बीमा और केवाईसी के नाम पर ठगे जा रहे हैं, जबकि युवा पार्ट टाइम नौकरी, लोन और ऑनलाइन गेम के झांसे में आ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि कई लोग ठगी का शिकार होने के बाद भी शिकायत नहीं करते। उन्हें लगता है कि पुलिस कुछ नहीं करेगी या बदनामी होगी। इसी कारण वास्तविक आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड से कहीं अधिक हो सकते हैं।

पिछले एक वर्ष में ठगी के तरीके और भी खतरनाक हो गए हैं। अब ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरा हूबहू तैयार कर रहे हैं। परिवार के सदस्य या मित्र की आवाज में इमरजेंसी बताकर पैसे मांगे जा रहे हैं। डीपफेक वीडियो बनाकर कंपनियों में फर्जी लेनदेन तक कराए जा रहे हैं। ऐसे में असली और नकली के बीच अंतर करना आम लोगों के लिए कठिन होता जा रहा है।

केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए 1930 हेल्पलाइन शुरू की है। साइबर सेल ने हजारों बैंक खाते फ्रीज कराए हैं और बड़ी राशि पीड़ितों को वापस दिलाई है। स्कूलों, कॉलेजों और आवासीय कॉलोनियों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। बैंकों को बड़े लेनदेन पर ग्राहकों को अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी चुनौती यह है कि अधिकांश गिरोह दूसरे राज्यों या विदेशों से संचालित होते हैं और रकम क्रिप्टोकरेंसी या विदेशी खातों में भेज दी जाती है, जिससे उसका पता लगाना कठिन हो जाता है।

साइबर विशेषज्ञों की सलाह स्पष्ट है। किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल पर भरोसा न करें। पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी के नाम पर डराया जाए तो पहले सत्यापन करें। सोशल मीडिया पर बने नए परिचितों के साथ पैसे या निवेश की चर्चा से बचें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें। बैंक कभी व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर जानकारी नहीं मांगते। ओटीपी, पासवर्ड और कार्ड संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। परिवार के सदस्य के नाम से पैसे मांगने वाला कॉल आए तो पहले उससे सीधे संपर्क कर पुष्टि करें। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और सतर्कता ही है। डिजिटल युग में अब दरवाजे पर नहीं, बल्कि अपने दिमाग पर ताला लगाने की जरूरत है।

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