भोपाल, 17 जुलाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को भोपाल में आयोजित प्रेसवार्ता में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के क्रियान्वयन में ग्राम सभा की प्रक्रिया, मुआवजा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन जैसे विभिन्न मामलों में अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही उन्होंने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराकर सरकार से सार्वजनिक जवाब देने की मांग की।
सिंघार ने बताया कि 14 जुलाई को उन्होंने छतरपुर जिले की बिजावर तहसील के कूपी गांव सहित परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान किसानों, आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों से बातचीत में मिले दस्तावेजों और शिकायतों को उन्होंने "द केन-बेतवा फाइल्स" नाम से सार्वजनिक किया।
प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित गांवों में कानून के अनुरूप ग्राम सभाओं की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि कई ग्रामीणों को सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट की जानकारी नहीं दी गई और उन्हें प्रक्रिया में शामिल भी नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ग्राम पंचायतों के अभिलेखों में एक जैसी कार्यवाही दर्ज है और अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर ग्राम सभा आयोजित होने का उल्लेख किया गया है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने खरिहानी ग्राम पंचायत के एक रजिस्टर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 17 फरवरी 2022 की कार्यवाही में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिसने उस समय सरपंच का कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। उन्होंने इसे गंभीर दस्तावेजी अनियमितता बताते हुए जांच की मांग की।
मुआवजा वितरण को लेकर भी उन्होंने कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कुछ गांवों में स्वीकृत मुआवजा ऐसे लोगों को दिया गया, जो वर्षों पहले वहां से जा चुके थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक ऐसे परिवार के नाम भी मुआवजा स्वीकृत किया गया, जो ग्रामीणों के अनुसार गांव में निवास नहीं करता था, जबकि कई वास्तविक प्रभावित परिवार अब भी मुआवजे से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने ऐसे 500 से अधिक मामलों की पहचान करने का दावा किया है।
भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सिंघार ने सुकवाहा गांव की एक आदिवासी महिला का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि संबंधित महिला की जानकारी के बिना उसकी भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई और उसी आधार पर मुआवजा स्वीकृत कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण महिला को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे किसानों और आदिवासियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, कई लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए तथा हिरासत के दौरान धन वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वन स्वीकृति की शर्तों के अनुसार पुनर्वास और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पहले पूरी की जानी थी, लेकिन कई मामलों के लंबित रहने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी एक निर्माण कंपनी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 60 करोड़ रुपये का चंदा दिया और बाद में उसे परियोजना का बड़ा ठेका मिला। उन्होंने इस संबंध में भी स्वतंत्र जांच की मांग की।
सिंघार ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि किसानों, आदिवासियों के अधिकार, पारदर्शिता और कानून के पालन से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने ग्राम सभा की प्रक्रिया, मुआवजा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन की उच्चस्तरीय जांच तथा सोशल ऑडिट कराने की मांग दोहराई।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं से प्रभावित किसान और आदिवासी उचित मुआवजा एवं पुनर्वास की मांग को लेकर जल सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।













