कानपुर, 17 जुलाई।
कल्याणपुर थाना पुलिस, साइबर हेल्प डेस्क और साइबर क्राइम सेल पश्चिम जोन की संयुक्त टीम ने फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर लोगों से धन वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से बड़ी संख्या में संदिग्ध दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, प्रिंटर, स्कैनर, सरकारी कार्यालयों की नकली मोहरें और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित फर्जी पोर्टलों के माध्यम से दस्तावेज तैयार करते थे। जांच में यह भी पता चला कि तीनों करीब एक वर्ष से इस अवैध गतिविधि में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने इनसे फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
गश्त के दौरान इंद्रा नगर चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक सैय्यद खालिम सज्जाद को सूचना मिली थी कि जीटी रोड पर मेट्रो पिलर संख्या 38-39 के पास स्थित एक साइबर कैफे में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। सूचना के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर संयुक्त टीम ने मौके पर छापेमारी कर कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नानकारी निवासी तेजस पाल, बिठूर थाना क्षेत्र के चकरतनपुर निवासी नितेश कुमार और कल्याणपुर के लवकुशपुरम निवासी अनुराग को गिरफ्तार कर लिया।
तलाशी में चार स्मार्ट मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, सीपीयू, प्रिंटर-स्कैनर, वेब कैमरा, की-बोर्ड, माउस, केबल, 21 सरकारी गजट, 120 जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, 112 आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र, दो संदिग्ध आधार अपडेट प्रमाणपत्र, सात संदिग्ध फर्जी मोहरें, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, पांच वोटर आईडी कार्ड, आठ पैन कार्ड, 47 आधार कार्ड सहित अन्य सरकारी और निजी दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा आरोपितों के पास से 29 हजार 220 रुपये नकद भी मिले।
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे विभिन्न वेबसाइटों और ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज तैयार करते थे।
दस्तावेजों को असली जैसा दिखाने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों और डिजिटल सेवा केंद्रों के नाम की फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया जाता था। दस्तावेज तैयार होने के बाद ग्राहकों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
प्राथमिक जांच में आरोपितों द्वारा उपयोग किए जा रहे पोर्टल अधिकृत सरकारी पोर्टल नहीं पाए गए। बरामद दस्तावेजों पर अंकित क्यूआर कोड और अन्य विवरणों का तत्काल अधिकृत अभिलेखों एवं वेबसाइटों से सत्यापन नहीं हो सका, जिससे दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदिग्ध और कूटरचित प्रतीत हुए।
पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत कल्याणपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया है। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेज, मोहरें, नकदी और डिजिटल उपकरणों को सील कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस गिरोह के अन्य सहयोगियों, संदिग्ध पोर्टलों के संचालकों, फर्जी दस्तावेज बनवाने वालों और अपराध से अर्जित धन के स्रोतों की भी विस्तृत जांच कर रही है।













