शिवपुरी, 17 जुलाई।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किला से करीब 400 वर्ष पुरानी एक ऐतिहासिक तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, राज्य पुरातत्व विभाग ने भी पूरे मामले को गंभीर मानते हुए किले का निरीक्षण करने की बात कही है।
पुलिस के अनुसार बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश एक लोडिंग वाहन के साथ किले के पिछले रास्ते से भीतर पहुंचे। बदमाशों ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर भगा दिया और 16वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक तोप अपने साथ ले गए। पुलिस का कहना है कि 10वीं सदी में कछवाहा राजपूतों द्वारा पुनर्निर्मित माने जाने वाले इस किले में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें थीं, जिनमें अब 13 बची हैं। मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।
ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि आधी रात के समय 25 से 30 लोग अचानक पीछे के रास्ते से किले में दाखिल हुए। सभी के पास हथियार थे, जबकि सुरक्षा कर्मियों के पास केवल एक लाठी थी और टॉर्च जैसी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। बदमाशों ने जान से मारने की धमकी देकर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद वे ओपन कचहरी पहुंचे, जहां सिंधिया काल की 14 तोपें रखी थीं। वहीं से एक तोप उठाकर ले गए। घटना के अगले दिन इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि बदमाशों ने वारदात से पहले इसकी तैयारी कर ली थी। पुलिस के अनुसार पांच जुलाई को कुछ लोग पहली बार किले में पहुंचे थे और एक तोप को उसकी जगह से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अधिक वजन होने के कारण उसे ले नहीं जा सके। इसके बाद 15-16 जुलाई की रात वे पूरी तैयारी और लोडिंग वाहन के साथ लौटे तथा तोप लेकर फरार हो गए।
राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने बताया कि किले की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया जाएगा और तोप की बरामदगी के लिए पुलिस के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए वह जल्द ही नरवर किले का दौरा करेंगे।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार ये तोपें केवल धातु के सामान्य अवशेष नहीं हैं, बल्कि पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु के मिश्रण से तैयार की गई हैं। इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में राजचिह्न अंकित हैं। इनका आधिकारिक मूल्य निर्धारित नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में 16वीं शताब्दी की ऐसी तोपों की कीमत दो से पांच करोड़ रुपये तक आंकी जाती है। इसी कारण पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है।













