भोपाल, 23 जुलाई।
देश की स्वतंत्रता के इतिहास में अमर शहीद कुंवर चैन सिंह की शहादत को विशेष स्थान प्राप्त है। उनके शहादत दिवस पर शुक्रवार, 24 जुलाई को सीहोर स्थित स्मारक पर उन्हें और उनके साथियों को शासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार वर्ष 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी और भोपाल रियासत के तत्कालीन नवाब के बीच हुए समझौते के बाद सीहोर में अंग्रेजी सेना की छावनी स्थापित की गई थी। कंपनी की ओर से नियुक्त पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को इस सैन्य छावनी की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस व्यवस्था का नरसिंहगढ़ रियासत के युवराज कुंवर चैन सिंह ने विरोध करते हुए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का रास्ता चुना।
बताया जाता है कि अंग्रेजों के प्रति वफादार माने जाने वाले दीवान आनंदराम बख्शी और मंत्री रूपराम बोहरा की हत्या के बाद अंग्रेजों ने उनके सामने कई शर्तें रखीं, लेकिन कुंवर चैन सिंह ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अंग्रेजी शासन और उनके बीच संघर्ष की स्थिति बन गई।
24 जुलाई 1824 को अंग्रेज अधिकारियों द्वारा उन्हें शिविर से बाहर जाने से रोका गया, लेकिन उन्होंने आदेश मानने से इनकार करते हुए शिविर छोड़ दिया। इसके बाद अंग्रेजी सेना ने सीहोर, डाबरी, भोपाल और होशंगाबाद से सैनिक बुलाकर उनके शिविर को चारों ओर से घेर लिया।
24 जुलाई 1824 की रात अंग्रेजी सेना ने कुंवर चैन सिंह के शिविर पर हमला किया। इस दौरान उन्होंने अपने विश्वस्त साथियों हिम्मत खां, बहादुर खां और 43 सैनिकों के साथ वीरता से मुकाबला किया तथा युद्ध में वीरगति प्राप्त की। उनकी शहादत को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाता है।
मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2015 से प्रत्येक वर्ष 24 जुलाई को सीहोर स्थित शहीद कुंवर चैन सिंह स्मारक पर उन्हें और उनके साथियों को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर श्रद्धांजलि अर्पित करती है। इस वर्ष भी शुक्रवार को प्रातः 11:30 बजे दशहरा मैदान स्थित स्मारक पर जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।












