नई दिल्ली, 24 जुलाई।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित कार्यक्रम में सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि सात शताब्दियों से चली आ रही पंढरपुर वारी परंपरा सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने इसे भारत की जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
आईजीएनसीए में आयोजित “पंढरपुर वारी – 700 वर्ष पुरानी परंपरा पर संवाद एवं प्रस्तुति” कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न देशों के राजनयिकों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को इस परंपरा के सांस्कृतिक, सामाजिक और सभ्यतागत महत्व से परिचित कराना था। कार्यक्रम में श्रद्धा, समता, सेवा, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव जैसे मूल्यों पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम में भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख विजय चौथाईवाले ने कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत नामदेव, संत एकनाथ और संत तुकाराम ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से समाज में नैतिक शक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया।
इस अवसर पर वैभव डांगे द्वारा लिखित पंढरपुर वारी पर आधारित मोनोग्राफ का लोकार्पण भी किया गया। उन्होंने वारी को केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सात सौ वर्षों से चली आ रही ऐसी परंपरा बताया, जो समता, सेवा, विनम्रता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के मूल्यों को आगे बढ़ाती है।
कार्यक्रम में रूस, सूरीनाम, फिलीपींस, अंगोला, मॉरीशस, थाईलैंड, अमेरिका, मोल्दोवा, ऑस्ट्रेलिया, भूटान, इंडोनेशिया और ब्राजील सहित कई देशों के राजनयिक एवं सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।















