ग्वालियर, 30 जुलाई।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत धर्म और आध्यात्मिक शक्ति है। हमारी संस्कृति पूरी दुनिया को परिवार मानने वाले भाव पर आधारित है और यही शक्ति भारत को विश्वगुरु बनने की क्षमता प्रदान करती है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल गुरुवार को ग्वालियर में तुलसी मानस प्रतिष्ठान के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
मानस भवन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने की। कार्यक्रम में जड़ेरूआ धाम के संत हरिदास महाराज, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार, संस्थान अध्यक्ष अभय पापरीकर और महेश मुदगल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई देशों में अराजकता बढ़ रही है। ऐसे दौर में पूरे विश्व को परिवार मानने वाले भारत के नेतृत्व की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि विरासत में मिली आध्यात्मिक धरोहर और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने के साथ उन्हें आगे बढ़ाया जाए।
शुक्ल ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे आधुनिकता के साथ आगे बढ़ें, लेकिन अपनी संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि ग्वालियर का तुलसी मानस प्रतिष्ठान इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि रामचरित मानस आध्यात्मिक ज्ञान का प्रमुख स्रोत है। यदि इसके संदेशों को जीवन में अपनाया जाए तो व्यक्ति गलत मार्ग पर जाने से बच सकता है। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, शिक्षा में संस्कारों का होना भी जरूरी है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा से युवा पीढ़ी सही दिशा में आगे बढ़ेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देगी।
आध्यात्म में छिपा है बुराइयों से निकलने का मार्ग : तोमर
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बुराइयों से बाहर निकलने का रास्ता आध्यात्म में निहित है। इसी उद्देश्य से पूर्वजों ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि संस्था ने 50 वर्षों की यात्रा में अपनी विरासत को बनाए रखने और तुलसीदास रचित रामचरित मानस को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस ग्रंथ के अध्ययन से व्यक्ति में विनम्रता, श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव विकसित होता है।
तोमर ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों को स्वर्ण जयंती पूर्ण होने पर शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि संस्था आगे भी सनातन संस्कृति के संरक्षण में योगदान देती रहेगी।
विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने संस्थान के पुस्तकालय विस्तार के लिए अपनी विधायक निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संस्था पिछले 50 वर्षों से तुलसीदास जी के विचारों और रामचरित मानस को लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।
पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि तुलसी मानस प्रतिष्ठान सामाजिक चेतना और राष्ट्रभाव जागृत करने के साथ धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागरण का कार्य भी कर रहा है।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्थान अध्यक्ष अभय पापरीकर ने दिया। महेश मुदगल ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन रामबाबू कटारे ने किया।

















