भोपाल, 31 जुलाई।
मध्य प्रदेश में अब भवन निर्माण की अनुमति लेने की प्रक्रिया पहले से आसान होने जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण अनुमति से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए कई एनओसी की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नई व्यवस्था में प्रक्रिया को अधिक ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब भवन निर्माण अनुमति के लिए आवेदन, नक्शे और जरूरी दस्तावेज डिजिटल माध्यम से जमा किए जाएंगे। आवेदकों को हार्ड कॉपी देने की जरूरत नहीं होगी।
नई व्यवस्था के तहत यदि भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करता है तो उसे ऑनलाइन शपथ-पत्र देना होगा। वहीं अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन करने पर भूमि स्वामी का हस्ताक्षरित शपथ-पत्र अपलोड करना अनिवार्य रहेगा।
कई एनओसी की जरूरत खत्म
सरकार ने अनुमति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए कई अनावश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की बाध्यता समाप्त कर दी है। अब एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और विरासत क्षेत्रों से जुड़ी एनओसी केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां जीआईएस आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा।
इसके अलावा सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, विद्युत विभाग और नजूल विभाग से संबंधित कई एनओसी की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
विभागों के बीच समन्वय करेगा प्रशासन
रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल और विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में अब आवेदक को खुद एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर सक्षम अधिकारी सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजेगा और संबंधित विभाग को 21 दिन में अपनी राय देनी होगी।
निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पर्यावरण और अग्निशमन नियमों में भी बदलाव
नई व्यवस्था में पर्यावरण स्वीकृति केवल निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए आवश्यक होगी। पेड़ों की कटाई की अनुमति भी तभी लेनी होगी, जब निर्माण कार्य के लिए वास्तव में पेड़ हटाने का प्रस्ताव हो।
अग्निशमन विभाग की एनओसी राष्ट्रीय भवन संहिता के प्रावधानों के अनुसार लागू होगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि इन बदलावों से भवन अनुमति प्रक्रिया तेज और नागरिकों के लिए सुविधाजनक होगी। ऑनलाइन व्यवस्था से समय की बचत होगी और लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

















