भोपाल, 31 जुलाई।
राजधानी के बड़े तालाब, कालियासोत और केरवा डैम के वेटलैंड और एफटीएल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने कहा है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों से अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और तहसीलदार की होगी।
न्यायाधिकरण ने निर्देश दिए कि यदि तीन सप्ताह के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से एनजीटी के समक्ष जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।
राशिद नूर खान, आर्या श्रीवास्तव और डॉ. सुभाष सी. पांडेय की याचिकाओं पर हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने बड़े तालाब के एफटीएल क्षेत्र में चिह्नित अतिक्रमण और कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत की। रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को वेटलैंड, एफटीएल, प्रतिबंधित क्षेत्र और मास्टर प्लान के उल्लंघन वाले सभी अवैध निर्माणों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
न्यायाधिकरण ने तीन सप्ताह में शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें कुल अतिक्रमण, हटाए गए कब्जे, शेष अतिक्रमण और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल हो।
117 अतिक्रमण चिन्हित, 72 अब भी बाकी
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार बड़े तालाब के 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र से जुड़े प्रेमपुरा, धर्मपुरी, सेवनिया गोंड, गौरा गांव, बिशनखेड़ी, बीलखेड़ा और कोटरा सुल्तानाबाद में सर्वे के दौरान कुल 117 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं।
इनमें 68 अतिक्रमण सरकारी भूमि और 49 निजी भूमि पर पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 45 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 72 अतिक्रमण अभी भी मौजूद हैं। इनमें 45 सरकारी और 27 निजी भूमि से जुड़े हैं।
वैज्ञानिक सीमांकन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी. पांडेय ने एनजीटी के सामने बड़े तालाब, कालियासोत और केरवा डैम का वैज्ञानिक सीमांकन कराने, बॉटनिकल गार्डन की सुरक्षा और वेटलैंड क्षेत्र में रासायनिक खाद व कीटनाशकों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग रखी।
अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने कहा कि प्रशासन कार्रवाई का दावा कर रहा है, लेकिन नए अतिक्रमण सामने आ रहे हैं।
टीटी नगर वृत्त के एसडीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बताया कि कई अतिक्रमण हटाए गए हैं, लेकिन पुलिस बल की कमी और कुछ मामलों में न्यायालय के अंतरिम आदेशों के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
एनजीटी ने कहा कि पुलिस बल की कमी कार्रवाई में बाधा नहीं बन सकती। न्यायाधिकरण ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने वाली समिति में पुलिस आयुक्त या एसएसपी द्वारा नामित अधिकारी को शामिल किया जाए।
मड रेसिंग पर भी रोक के निर्देश
सुनवाई के दौरान बड़े तालाब, भोज वेटलैंड, केरवा और कालियासोत क्षेत्र में बारिश के दौरान होने वाली मड रेसिंग और ऑफ-रोड वाहनों की गतिविधियों का मुद्दा भी उठा।
प्रशासन ने बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में मड रेसिंग करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और निगरानी के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रतिबंधित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना जरूरी है।

















