भोपाल, 31 जुलाई।
मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिनोपैथीज का प्रभावी नियंत्रण जनजागरूकता, जनभागीदारी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संभव है। उन्होंने कहा कि ये बीमारियां केवल स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौती नहीं हैं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा विषय हैं।
उप मुख्यमंत्री शुक्रवार को भोपाल में आयोजित “स्टेट लेवल कंसल्टेशन मीटिंग ऑन हीमोग्लोबिनोपैथीज : संकल्प से समाधान” कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान, गुणवत्तापूर्ण उपचार, जेनेटिक काउंसिलिंग और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल मंगुभाई पटेल के मार्गदर्शन और निगरानी में मध्य प्रदेश सिकल सेल और एनीमिया से मुक्ति की दिशा में लगातार काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को इन बीमारियों से मुक्त बनाकर स्वस्थ और विकसित मध्य प्रदेश तैयार करना है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने हीमोग्लोबिनोपैथीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार आईईसी सामग्री का विमोचन भी किया।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और समय से पहले 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग लक्ष्य हासिल करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 40,648 सिकल सेल रोगी, 2,44,761 सिकल सेल वाहक, 1,178 थैलेसीमिया रोगी और 857 थैलेसीमिया वाहक पंजीकृत किए गए हैं। इन सभी को आवश्यक उपचार और परामर्श सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्क्रीनिंग के साथ कंटिन्यूअम ऑफ केयर मॉडल विकसित किया है। इसके तहत उप स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों, इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ हीमोग्लोबिनोपैथी एंड हीमोफीलिया, सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक उपचार व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पतालों में एचपीएलसी आधारित जांच, निशुल्क दवा, सुरक्षित रक्ताधान, न्यूमोकोकल टीकाकरण और नियमित फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। रीवा में प्रसवपूर्व जांच के लिए राज्य का पहला शासकीय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और भोपाल व इंदौर में सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रहे “सिकल मित्र-थैल मित्र” अभियान के माध्यम से तीन हजार से अधिक स्वयंसेवक जागरूकता, जेनेटिक काउंसिलिंग, स्क्रीनिंग और उपचार के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सिकल सेल, थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिन विकारों के लिए एकीकृत उपचार मॉडल अपनाने की जरूरत है। इसके तहत नवजात स्क्रीनिंग, परिवार आधारित और प्री-मैरिटल जेनेटिक काउंसिलिंग, आधुनिक जांच सुविधाओं, सुरक्षित रक्त सेवाओं, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला में विशेषज्ञों से मिले सुझावों को स्वास्थ्य सेवाओं और योजनाओं में शामिल किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
थैलेसीमिक्स इंडिया के अध्यक्ष दीपक चोपड़ा ने गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, सुरक्षित रक्ताधान सुविधाओं के विस्तार और मरीजों व परिवारों तक बेहतर परामर्श सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बीमारी की रोकथाम, जांच, उपचार, जेनेटिक काउंसिलिंग और सामुदायिक भागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि और विकास सहयोगी संस्थाओं के सदस्य मौजूद रहे।

















