नई दिल्ली, 31 जुलाई।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपराओं को सही तरीके से संरक्षित करना देश की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान को सटीकता, अनुशासन और सहयोग के साथ सुरक्षित रखना जरूरी है।
शेखावत शुक्रवार को दिल्ली स्थित अशोक संग्रहालय में ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय डिजिटलीकरण अभियान कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के लिए गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि भारत की ज्ञान प्रणालियों को अखंड रूप में आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला सदियों पुराने ज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक संगठित राष्ट्रीय प्रयास है। हमारे पूर्वजों और ऋषि-मुनियों ने विभिन्न विषयों पर बड़ी संख्या में पांडुलिपियों की रचना की है। इन्हें वर्गीकृत करना, संहिताबद्ध करना और प्रकाशित करना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है।
उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत अब तक 1.2 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने पांडुलिपि संरक्षण कार्य में देशभर में एकरूपता, गुणवत्ता और बेहतर समन्वय के लिए व्यवस्थित तरीके से काम करने पर जोर दिया। संयुक्त सचिव समर नंदा ने मिशन के मूल ढांचे और राष्ट्रीय उद्देश्यों की जानकारी दी।
ज्ञान भारतम निदेशक इंदरजीत सिंह और परियोजना निदेशक प्रो. अनिर्बन डैश ने मिशन के डिजिटल ढांचे और दो चरणों वाली कार्यप्रणाली के बारे में बताया। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटलीकरण और ज्ञान सत्यापन शामिल है।
कार्यशाला में राष्ट्रीय डिजिटलीकरण लक्ष्यों की समीक्षा, इमेजिंग और मेटाडेटा मानकों को बेहतर बनाने, कार्यान्वयन रणनीति, चुनौतियों के समाधान और एकीकृत राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
राजस्थान, बोरी (पुणे), जम्मू-कश्मीर, एशियाटिक सोसाइटी (कोलकाता), कोबा (गुजरात), वृंदावन अनुसंधान संस्थान, सेवाधी (केरल) और जामिया हमदर्द सहित कई संस्थानों ने अपने अनुभव और नवाचार साझा किए।
मंत्रालय ने डिजिटल पांडुलिपि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एआई प्लेटफॉर्म और पारदर्शी पहुंच नीति की जानकारी दी। इसके तहत राज्यों और केंद्रों को आधुनिक उपकरण, आधारभूत सुविधाएं और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यशाला में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, संस्थानों, विद्वानों, विशेषज्ञों और तकनीकी भागीदारों के 200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

















