देहरादून, 01 अगस्त।
देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में वर्ष 2024-26 प्रशिक्षण सत्र के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत-गृह में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 111 परिवीक्षार्थियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर पास आउट किया। इनमें 21 महिला प्रशिक्षु और भूटान के दो विदेशी प्रशिक्षु भी शामिल रहे।
समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने नवदीक्षित अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और सतत विकास के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्य करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकारियों से नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ कार्य करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दक्षता के साथ सेवा भावना भी समान रूप से आवश्यक है।
भूपेंद्र यादव ने महात्मा गांधी के जीवन में नैतिकता के महत्व का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने विचारों से भी प्रेरणा देने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और भारतीय वन सेवा को अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवदीक्षित अधिकारी निष्ठा, ईमानदारी और निर्भीकता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी, अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और डेटा आधारित तकनीकें समय की आवश्यकता बन चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तकनीक से अधिक महत्वपूर्ण अधिकारी की निर्णय क्षमता, कार्यकुशलता और प्रदर्शन होता है।
इस प्रशिक्षण बैच में सबसे अधिक 11 अधिकारी मध्य प्रदेश कैडर को आवंटित किए गए हैं। उत्तराखंड को पांच नए भारतीय वन सेवा अधिकारी मिले हैं। समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित भी किया गया।
वर्ष 1938 में स्थापित यह संस्थान पहले इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज के नाम से जाना जाता था और वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के रूप में कार्य कर रहा है। पिछले 88 वर्षों में यहां स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
समारोह के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारतीय वन सेवा के नवदीक्षित अधिकारी अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





















