नई दिल्ली, 01 अगस्त।
भारत अब दुनिया के नक्शे पर केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख चिकित्सा गंतव्य के रूप में भी उभरकर सामने आया है। नई दिल्ली, जयपुर, चेन्नई और मुंबई जैसे शहरों में अब केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले मरीजों की भी बड़ी संख्या देखने को मिल रही है। इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा। वर्ष 2009 में जहां भारत में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या 1.12 लाख थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 5.07 लाख तक पहुंच गई। यानी केवल 16 वर्षों में यह संख्या लगभग 4.5 गुना बढ़ गई है और यह वृद्धि लगातार जारी है।
विदेशी मरीजों को भारत की ओर आकर्षित करने का सबसे बड़ा कारण यहां उपलब्ध विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, कम लागत और तेजी से इलाज की व्यवस्था है। अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में जहां एक सामान्य सर्जरी के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और महीनों इंतजार करना पड़ता है, वहीं भारत में वही इलाज लगभग एक-तिहाई लागत पर और बिना देरी के उपलब्ध हो जाता है। इसके अलावा, भारत में कुशल डॉक्टर, आधुनिक तकनीक और अंग्रेजी भाषा की समझ भी विदेशी मरीजों के लिए बड़ा आकर्षण है। हृदय सर्जरी, घुटना प्रत्यारोपण, कैंसर का उपचार, कॉस्मेटिक सर्जरी और आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए दुनिया भर से लोग भारत का रुख कर रहे हैं।
भारत सरकार ने भी मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। 172 देशों के नागरिकों के लिए ई-मेडिकल वीजा की सुविधा शुरू की गई है, जिससे विदेशी मरीजों के लिए भारत आना आसान हुआ है। पहले जहां वीजा प्रक्रिया लंबी और जटिल थी, वहीं अब ऑनलाइन आवेदन के कुछ ही दिनों में मेडिकल वीजा मिल जाता है। इसके साथ ही सरकार ने अस्पतालों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने तथा विदेशी मरीजों के लिए विशेष हेल्प डेस्क और भाषा अनुवादकों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। निजी अस्पतालों ने भी इस दिशा में तेजी से काम किया है और कई बड़े अस्पतालों में अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए अलग विभाग स्थापित किए गए हैं।
भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2025 में इसका आकार 84 हजार करोड़ रुपये का था और अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस वृद्धि के पीछे न केवल विदेशी मरीजों की बढ़ती संख्या है, बल्कि सस्ते और गुणवत्तापूर्ण इलाज की भारत की मजबूत साख भी है। बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, अफगानिस्तान और अफ्रीका के कई देशों से बड़ी संख्या में मरीज भारत आ रहे हैं। इन देशों में या तो चिकित्सा सुविधाओं की कमी है या इलाज अत्यधिक महंगा है। ऐसे में भारत उनके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प बनकर उभरा है। इसके अलावा मध्य-पूर्व और रूस के मरीज भी अब भारत में इलाज कराना पसंद कर रहे हैं।
भारत की चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत यहां के डॉक्टर और नर्स हैं। भारतीय डॉक्टर दुनिया भर में अपनी विशेषज्ञता और समर्पण के लिए जाने जाते हैं। कई भारतीय डॉक्टर अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अस्पतालों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं, वहीं अनेक विशेषज्ञ भारत में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की प्राचीन परंपरा भी विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रही है। जो लोग एलोपैथी के साथ वैकल्पिक चिकित्सा की तलाश में हैं, उनके लिए भारत एक बेहतर विकल्प बन चुका है।
हालांकि, इस क्षेत्र में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने की है। कुछ निजी अस्पतालों पर विदेशी मरीजों से अधिक शुल्क वसूलने और भ्रामक जानकारी देने के आरोप भी सामने आए हैं। इससे भारत की साख प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार और अस्पताल प्रबंधन को मिलकर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी। दूसरी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की है, क्योंकि मेडिकल टूरिज्म अभी मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है।
विदेशी मरीजों के आने से भारत की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ हो रहा है। मरीजों के साथ आने वाले परिजन होटल, परिवहन और स्थानीय बाजारों में खर्च करते हैं, जिससे पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है। कई ट्रैवल एजेंसियां अब चिकित्सा और पर्यटन को जोड़कर विशेष मेडिकल टूर पैकेज उपलब्ध करा रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और भारत की पहचान एक विश्वसनीय स्वास्थ्य केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है।
भारत ने पिछले दो दशकों में चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारत केवल अपने नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती इलाज की उम्मीद बन चुका है। यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर इसी गति से निवेश और सुधार जारी रखते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद चिकित्सा केंद्र बन जाएगा तथा वर्ष 2030 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये के मेडिकल टूरिज्म बाजार का लक्ष्य भी हासिल कर लेगा।





















