लखनऊ, 1 अगस्त।
विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक अवर अभियंता, सुपरवाइजर और एक निजी व्यक्ति को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 7.50 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। आरोप है कि शिकायतकर्ता से कुल 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, लखनऊ सेक्टर के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा निर्माणाधीन स्थल पर पहुंचे और आईजीआरएस पर शिकायत का हवाला देते हुए काम रुकवाने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ता को श्रवण कुमार से मिलकर मामला निपटाने के लिए कहा गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार श्रवण कुमार ने उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल के गेट पर बुलाया और दावा किया कि उसकी अवर अभियंता से बात हो चुकी है। आरोप है कि कार्रवाई से बचाने के बदले 15 लाख रुपये की मांग की गई। बाद में कार्यालय पहुंचने पर शिकायतकर्ता की मुलाकात अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश से हुई, जहां भी रिश्वत की मांग दोहराई गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके पास एक साथ पूरी रकम नहीं थी, इसलिए उसने 7.50-7.50 लाख रुपये की दो किस्तों में भुगतान करने की बात कही। साथ ही उसने स्पष्ट किया कि वह रिश्वत नहीं देना चाहता और आरोपितों को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है।
शिकायत दर्ज होने के बाद विजिलेंस ने मामले की गोपनीय जांच की। जांच में सामने आया कि अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और निजी व्यक्ति श्रवण कुमार ने कथित रूप से मिलीभगत कर आईजीआरएस पोर्टल का दुरुपयोग करते हुए शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगी थी। सर्विलांस सहित अन्य माध्यमों से भी आरोपों के संबंध में साक्ष्य जुटाए गए।
शिकायत की पुष्टि होने के बाद 1 अगस्त को विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता से 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते समय अवर अभियंता, सुपरवाइजर और निजी व्यक्ति को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। तीनों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।






















