जोधपुर, 1 अगस्त।
जोधपुर प्रवास के दौरान सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत करते हुए वर्तमान भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तमाम विकास कार्यों का हाल बद से बदतर होता जा रहा है।
गहलोत ने कहा कि राज्य में दवाइयों, ऑपरेशनों और इलाज का खर्च आसमान छू रहा है, वहीं उनकी पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लागू की गई कल्याणकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ आम जनता तक वक्त पर नहीं पहुंच रहा। उन्होंने दावा किया कि पेंशनभोगियों को समय पर पेंशन का भुगतान नहीं मिल रहा और सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हो रही है। एनजीओ आंदोलन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राहुल गांधी ने पुरजोर तरीके से उठाया था जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बना था।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्रदेश में हत्या, दुकान लूट, बलात्कार और डकैती जैसी जघन्य वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अकाल और जल संकट की आशंका जताते हुए उन्होंने सरकार को आगाह किया कि कई जिलों में वर्षा की भारी कमी चिंता का विषय है, और यदि समय रहते पानी तथा पशुओं के चारे के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो हालात बेहद भयानक हो जाएंगे।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि अधिकांश विभागों में भुगतान अटके पड़े हैं तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके जीपीएफ और अन्य बकाया लाभ समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। वित्त विभाग के बाहर बुजुर्ग कर्मचारियों की लंबी कतारें इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल है। भ्रष्टाचार के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग ही दबी जुबान से प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार की चर्चा कर रहे हैं।
जोधपुर के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में छह सौ पचास करोड़ की लागत से फिनटेक इंस्टीट्यूट, स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और हॉस्टल्स जैसी अनेक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन मौजूदा सरकार उनका उद्घाटन तक करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री से जोधपुर आकर इन परिसरों का लोकार्पण करने का अनुरोध किया था, मगर अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।





















