कोलकाता, 03 अगस्त।
भारतीय साहित्य के महान कथाकार प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर कोलकाता स्थित नेशनल लाइब्रेरी के भाषा भवन सभागार में निर्देशक गुलबहार सिंह की फिल्म 'प्रेमचंद : एक जीवन' का विशेष प्रदर्शन किया गया। दूरदर्शन के लिए निर्मित इस फिल्म में प्रेमचंद के संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक दृष्टि और साहित्यिक चिंतन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
रशीद इकबाल की पटकथा पर आधारित यह फिल्म चार भागों में तैयार की गई है। लंबी अवधि के बावजूद सशक्त लेखन, सधी हुई प्रस्तुति और कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय के कारण यह कहीं भी बोझिल महसूस नहीं होती। फिल्म में उन स्थानों और घरों को भी शामिल किया गया है, जहां प्रेमचंद ने जीवन का महत्वपूर्ण समय बिताया या जिनसे उनका गहरा जुड़ाव रहा।
फिल्म में दिवंगत अभिनेता इरफान खान ने प्रेमचंद की भूमिका निभाई है। उनके अभिनय ने लेखक के व्यक्तित्व और संवेदनाओं को जीवंत रूप दिया। वहीं टॉम अल्टर ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा संजीव शुक्ला, अशोक मेहरा, सुधीर निगम, मंजुला सिंह, पुण्य दर्शन गुप्ता, प्रेम मोदी और कृष्ण कुमार पार्थ सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया, जिनमें से कई कोलकाता से जुड़े रहे हैं। आकाशवाणी से जुड़े प्रीतम खन्ना की गंभीर वाणी ने फिल्म के सूत्रधार के रूप में इसकी प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
फिल्म में प्रेमचंद के बचपन से लेकर जीवन के अंतिम समय तक की यात्रा को विस्तार से दिखाया गया है। इसमें उनके विचारों के विकास, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उनकी लेखनी, संघर्षों और साहित्य के माध्यम से समाज को दिशा देने के प्रयासों को मार्मिक ढंग से चित्रित किया गया है। यह भी दिखाया गया है कि किस प्रकार उन्होंने अपने विचारों के लिए अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
कार्यक्रम के दौरान यह चिंता भी सामने आई कि व्यापक शोध और मेहनत से बनी यह महत्वपूर्ण फिल्म आज आम दर्शकों की पहुंच से लगभग बाहर है। वर्तमान में यह दूरदर्शन सहित किसी प्रमुख डिजिटल मंच पर उपलब्ध नहीं है, जिससे नई पीढ़ी इस महत्वपूर्ण कृति से वंचित है।
निर्देशक गुलबहार सिंह ने बताया कि उन्होंने फिल्म को दोबारा सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध कराने के लिए कई बार दूरदर्शन के अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने सुझाव और ई-मेल भी भेजे, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

















