नई दिल्ली, 3 अगस्त।
देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यह अनुमान पहले की अपेक्षा बेहतर माना जा रहा है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक संकेतक, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और निर्यात में सुधार को प्रमुख वजह बताया गया है।
एसबीआई रिसर्च की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि दर भारतीय रिजर्व बैंक के पहले के अनुमान से बेहतर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण पहले अनुमान कम किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही के दौरान कई उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में व्यापक सुधार दर्ज किया गया। जून में घरेलू यात्री वाहन बिक्री में 24.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई। बिजली की मांग 11.5 प्रतिशत बढ़ी, निर्यात में 15.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ, औद्योगिक ऋण 19.2 प्रतिशत बढ़ा और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 7.3 प्रतिशत रहा। इससे तिमाही के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन मानसून की स्थिति में सुधार और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती से देश की आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा होने से देशभर में वर्षा की कमी घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गई। जलाशयों का जलस्तर सामान्य स्तर पर लौट आया है और खरीफ फसलों की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में केवल 4.7 प्रतिशत कम रही है, जिससे बेहतर फसल की संभावना जताई गई है।













