नई दिल्ली, 05 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार सुबह आत्मिक उन्नति को व्यक्ति और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का आत्मिक विकास होता है, तब उसके भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना स्वतः विकसित होती है। इसी प्रेरणा से देश का युवा हर क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने सामाजिक माध्यम पर एक सुभाषितम् साझा करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नीति का वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के आत्म उत्थान और दूसरों के कल्याण, दोनों को समान महत्व देता है।
साझा किए गए श्लोक का भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग इन दोनों उद्देश्यों को छोड़ केवल शब्दों का प्रदर्शन करते हैं, उनकी विद्वता केवल वाक्-कौशल तक सीमित रह जाती है। वास्तविक ज्ञान वही है, जो स्वयं के विकास के साथ समाज के हित को भी आगे बढ़ाए।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सुभाषितम् के रूप में प्रस्तुत यह श्लोक संस्कृत के महाकवि माघ रचित महाकाव्य शिशुपालवधम् से लिया गया है।














