भोपाल, 05 अगस्त।
मध्य प्रदेश में इस वक्त मानसून की चाल बेहद सुस्त पड़ चुकी है, जिसके चलते सूबे में बारिश का कुल आंकड़ा काफी नीचे लुढ़क गया है। राज्य भर में अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामान्य से अठारह फीसदी कम पानी गिरा है और पचपन में से तिरालीस जिलों में सूखे जैसे हालात या औसत से बेहद कम वर्षा दर्ज की गई है। पिछले लगभग पांच दिनों से बादलों की बेरुखी के कारण कहीं भी जोरदार बौछारें नहीं गिरी हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से कोई भी मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय नहीं था, जिस कारण से पानी बरसने का सिलसिला थम गया था। हालांकि अब एक नया पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती घेरे बनने से आने वाले कुछ दिनों में फिर से झमाझम बारिश होने की उम्मीद बंध गई है।
मौसम विभाग की तरफ से आज दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में भारी बारिश का रेड या येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सागर, जबलपुर तथा नर्मदापुरम संभाग के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो प्रदेश में अभी तक कुल चार सौ सात मिलीमीटर यानी लगभग सोलह इंच पानी ही गिरा है, जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से साढ़े उन्नीस इंच वर्षा होनी चाहिए थी। पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही संभागों में बादलों ने खासी कंजूसी दिखाई है, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्से पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
पूरे प्रदेश में सिर्फ सात जिले ऐसे हैं जहां बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन की गिनती सामान्य से अधिक बारिश पाने वालों में होती है। बाकी तमाम जिलों में मानसून का आंकड़ा तय पैमाने से काफी नीचे चल रहा है, लेकिन हाल ही में सक्रिय हुए नए वेदर सिस्टम से एक बार फिर अच्छी वर्षा की उम्मीद जाग उठी है।














