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राजनीति
06 Aug, 2026

मेडिकल टूरिज्म से भारत बना दुनिया का भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र

आधुनिक चिकित्सा, आयुष आधारित उपचार और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के कारण भारत मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक पहचान मजबूत कर रहा है।

नई दिल्ली, 6 अगस्त।

दुनिया में बढ़ती उपचार लागत और अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा अवधि के बीच भारत वैश्विक मेडिकल टूरिज्म का तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन गया है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों और आयुष आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय ने देश को विदेशी मरीजों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनाया है। इसका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार करीब 8.7 बिलियन डॉलर का आंका गया है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इसका आकार बढ़कर 16.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2025 में भारत आए 91.5 लाख विदेशी पर्यटकों में 5,07,244 लोग चिकित्सा सेवाओं के उद्देश्य से पहुंचे, जो कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 5.5 प्रतिशत रहे।

विदेशी मरीज हृदय शल्य चिकित्सा, आर्थोपेडिक उपचार, कैंसर थेरेपी, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरोलॉजिकल उपचार, कॉस्मेटिक सर्जरी, दंत चिकित्सा और प्रजनन उपचार जैसी सेवाओं के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। वर्तमान में 176 देशों के नागरिक यहां इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इनमें बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, तुर्कमेनिस्तान, ओमान और केन्या प्रमुख हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में मरीज भारत आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ आयुष आधारित उपचार प्रणाली ने भारत को अलग पहचान दिलाई है। उनके अनुसार, मेडिकल टूरिज्म के साथ वेलनेस टूरिज्म का भी तेजी से विस्तार हो रहा है, जिसमें योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष पद्धतियां अहम भूमिका निभा रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के साथ बेहतर जीवनशैली अपनाने का अवसर भी मिल रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, देश में 69,364 अस्पताल और 12 लाख से अधिक पंजीकृत चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड के मानकों के अनुरूप बड़ी संख्या में अस्पताल प्रमाणित हैं और कई संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिल चुकी है। इसी वजह से गुणवत्ता और किफायती उपचार के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मरीजों की सुविधा के लिए सरकार ने आयुष वीजा, ई-मेडिकल वीजा, ई-आयुष वीजा, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल पोर्टल सहित कई व्यवस्थाएं शुरू की हैं। इसके अलावा बजट 2026-27 में ऐसे क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जहां इलाज, शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में पर्यटन क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 5.22 प्रतिशत रहा। इससे लगभग 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल टूरिज्म विदेशी मुद्रा अर्जन, निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन के क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

देश के सरकारी और निजी अस्पतालों में हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आधुनिक तकनीक और अपेक्षाकृत कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा ने भारत को विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में मजबूत पहचान दिलाई है।

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