भोपाल, 06 अगस्त।
मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती तैयारी नहीं, बल्कि अनिश्चितता है। राज्य में भर्ती परीक्षाएं आयोजित कराने वाली सबसे बड़ी संस्था मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) पिछले कई महीनों से अपनी विश्वसनीयता लगातार खो रही है। परीक्षा कैलेंडर जारी होने के बाद भी बार-बार तारीखें बदली जा रही हैं, जिससे अभ्यर्थियों की मेहनत, समय और पैसा तीनों बर्बाद हो रहे हैं। जनवरी से अब तक चार बड़ी भर्ती परीक्षाओं की तारीख बदली जा चुकी है और यह सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा।
ताजा मामला समूह-2, उपसमूह-1 के अंतर्गत कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा-2026 का है। यह परीक्षा पहले 5 अगस्त से शुरू होनी थी, लेकिन एमपीईएसबी ने अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए इसे 17 सितंबर तक टाल दिया। इस एक फैसले से हजारों अभ्यर्थियों का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया। जो छात्र दूसरे जिलों से परीक्षा देने आते हैं, उन्होंने पहले से यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर ली थी, कोचिंग की फीस जमा कर दी थी और अंतिम चरण की तैयारी में जुटे थे। अचानक तारीख आगे बढ़ने से उनका मनोबल टूटा है और आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।
यह पहली बार नहीं है जब एमपीईएसबी ने परीक्षा की तारीख बदली हो। इससे पहले समूह-1, उपसमूह-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा-2025 को 10 फरवरी 2026 से बढ़ाकर 17 फरवरी कर दिया गया था। समूह-2 एवं उपसमूह-3 की भर्ती परीक्षा भी दो बार आगे बढ़ाई गई। पहले इसकी तारीख 15 दिसंबर निर्धारित थी, फिर उसे 23 जनवरी किया गया और अंत में 28 जनवरी कर दिया गया। वन रक्षक, क्षेत्र रक्षक एवं जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा को भी 4 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दिया गया। यानी लगभग हर महीने कोई न कोई परीक्षा टल रही है और हर बार कारण वही 'अपरिहार्य कारण' बताया जा रहा है, लेकिन वह कारण क्या है, यह किसी को नहीं बताया जा रहा।
फैक्ट फाइल पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है। जनवरी से अब तक चार भर्ती परीक्षाओं की तारीखें बदली जा चुकी हैं। 16 भर्ती परीक्षाओं की रूपरेखा एमपीईएसबी ने घोषित की है, लेकिन कई परीक्षाओं के नोटिफिकेशन अभी भी लंबित हैं। वर्ग-1 शिक्षक भर्ती परीक्षा-2026 तो प्रस्तावित सूची में शामिल ही नहीं है। इसका मतलब साफ है कि भर्ती प्रक्रिया में न समयबद्धता है और न ही पारदर्शिता।
इस लापरवाही का सबसे बड़ा असर प्रतियोगी छात्रों पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्र एक साथ कई परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उनका एक तय कार्यक्रम और रणनीति होती है। जब एक परीक्षा टलती है तो दूसरी परीक्षा से टकराव की स्थिति बन जाती है। कई बार दो अलग-अलग विभागों की परीक्षाएं एक ही दिन पड़ जाती हैं और छात्र को उनमें से किसी एक को छोड़ना पड़ता है। कोचिंग संस्थानों का शेड्यूल भी प्रभावित होता है। मॉक टेस्ट, रिवीजन और करंट अफेयर्स की तैयारी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाती है।
आर्थिक पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक छात्र को फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में औसतन तीन से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बार-बार तारीख बदलने से उसे दोबारा यात्रा करनी पड़ती है, दोबारा ठहरना पड़ता है और कई बार कोचिंग की अतिरिक्त फीस भी देनी पड़ती है। जो छात्र गरीब परिवारों से आते हैं, उनके लिए यह दोहरा झटका है। एक तरफ घर का खर्च, दूसरी तरफ बेरोजगारी का दबाव और ऊपर से संस्था की लापरवाही।
मनोवैज्ञानिक असर भी कम गंभीर नहीं है। लगातार तैयारी करने के बाद जब परीक्षा अंतिम समय में टल जाती है तो छात्र हताश हो जाता है। पढ़ाई में निरंतरता टूटती है और आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। कई छात्र ऐसे हैं जो पिछले दो-तीन वर्षों से एक ही परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और हर बार नई तारीख के साथ उनका सपना भी आगे खिसक जाता है। इससे उनमें व्यवस्था के प्रति गुस्सा और निराशा बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर भी अभ्यर्थी लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही।
आखिर एमपीईएसबी बार-बार तारीखें क्यों बदल रहा है? सूत्रों के अनुसार इसका मुख्य कारण प्रशासनिक समन्वय का अभाव और परीक्षा केंद्रों की अनुपलब्धता है। कई बार प्रश्नपत्र तैयार करने में देरी होती है तो कई बार तकनीकी दिक्कतें सामने आ जाती हैं। लेकिन इन सभी समस्याओं का खामियाजा आखिरकार छात्रों को ही भुगतना पड़ता है। एक जिम्मेदार संस्था से यह अपेक्षा کی जाती है कि वह पहले सभी तैयारियां पूरी करे और उसके बाद ही परीक्षा की तारीख घोषित करे। यहां उल्टा हो रहा है। पहले तारीख घोषित की जाती है और बाद में उसे बदल दिया जाता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सबसे पहले एमपीईएसबी को अपना परीक्षा कैलेंडर पूरी तैयारी के साथ जारी करना चाहिए और उसे अंतिम मानना चाहिए। बीच में बदलाव केवल आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों में ही होना चाहिए। दूसरा, एक प्रभावी शिकायत निवारण और सूचना तंत्र विकसित किया जाए, ताकि तारीख बदलने की स्थिति में अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय पहले जानकारी मिल सके। तीसरा, राज्य सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर एमपीईएसबी की कार्यप्रणाली की समीक्षा करानी चाहिए, ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।
मध्य प्रदेश युवा प्रधान राज्य है। यहां हर साल लाखों छात्र सरकारी नौकरी के लिए मेहनत करते हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया में ही अनिश्चितता बनी रहेगी तो बेरोजगारी और पलायन दोनों बढ़ेंगे। एक छात्र का एक वर्ष बर्बाद होना केवल उसका व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि पूरे राज्य की मानव संसाधन क्षमता का नुकसान है।
एमपीईएसबी को यह समझना होगा कि परीक्षा की तारीख केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं होती, बल्कि वह हजारों परिवारों की उम्मीद होती है। जब उसे बार-बार बदला जाता है तो केवल परीक्षा नहीं टलती, बल्कि किसी के भविष्य की दिशा भी टल जाती है। समय आ गया है कि संस्था अपनी जिम्मेदारी समझे और युवाओं को वह सम्मान दे, जिसके वे हकदार हैं। वरना यह नाराजगी आने वाले समय में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है और उसकी जिम्मेदारी लचर व्यवस्था पर ही होगी।















