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उत्तराखंड
06 Aug, 2026

उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल, कई नदियां खतरे के निशान पर

उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से कई नदियां खतरे और चेतावनी स्तर पर पहुंच गई हैं तथा भूस्खलन के कारण कई प्रमुख राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है।

देहरादून, 6 अगस्त।

लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्तराखंड में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई नदियां चेतावनी और खतरे के स्तर तक पहुंच गई हैं। वहीं भूस्खलन और मलबा आने से बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवाजाही बाधित हो गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए तीन जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी आपदा प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज वर्षा हुई। राजधानी देहरादून सहित कई जिलों में घने बादल छाए रहे और लगातार बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और नदी-नालों के उफान को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने और जल स्रोतों से दूर रहने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गुरुवार सुबह आठ बजे अलकनंदा का जलस्तर 627.80 मीटर और मंदाकिनी का 626.60 मीटर दर्ज किया गया। प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को नदी किनारों से दूर रहने की चेतावनी दे रहा है। ऊखीमठ में 53.30 मिमी और जखोली में 59 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

देवप्रयाग में भागीरथी नदी का जलस्तर सुबह छह बजे 462.00 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर के बराबर है। हरिद्वार जिले के रायसी में बाणगंगा नदी का जलस्तर 230.09 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से नौ सेंटीमीटर ऊपर है। संबंधित जिलों के प्रशासन को हालात पर लगातार नजर रखने और आवश्यक एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, लगातार वर्षा और भूस्खलन के चलते ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सिलाईबैंड और दुर्बिल के पास बंद है। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग चमोली के हेलंग क्षेत्र में मलबा आने से बाधित हो गया है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी धरासू-नालूपानी के निकट अवरुद्ध है।

इसके अलावा कर्णप्रयाग-थराली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग आमसौड़ के पास और धारचूला-तवाघाट मार्ग कूलागाड़ क्षेत्र में मलबा आने से बंद हैं। तवाघाट-गूंजी मार्ग भी कई स्थानों पर बाधित है। दूसरी ओर ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पापड़ागाड़ के पास छोटे वाहनों का आवागमन जारी है, जबकि भारी वाहनों के लिए मार्ग खोलने का कार्य चल रहा है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि ऋषिकेश-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तिलवाड़ा और बिजनौर-नजीबाबाद-कोटद्वार-सतपुली राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुगड्डा के पास मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है।

राज्य मार्गों में कालसी-चकराता मार्ग झाझरेड के पास और मार्चुला-सराईखेत-बैजरो-पोखड़ा-सतपुली-पौड़ी मार्ग के 107वें किलोमीटर पर मलबा आने से रास्ते बंद हैं। इन्हें खोलने के लिए मशीनों की मदद से कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से प्रदेश की स्थिति की समीक्षा कर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों को समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा है।

प्रशासन ने नागरिकों और पर्यटकों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे नहीं जाने तथा यात्रा से पहले मौसम और मार्ग की ताजा जानकारी लेने की अपील की है।

आसन नदी में जलप्रवाह बढ़ने और बड़ी मात्रा में कूड़ा-करकट व घास जमा होने से ट्रैश रैक पूरी तरह जाम हो गई। इसके कारण पावर चैनल में पानी देना संभव नहीं हो सका। गुरुवार सुबह 8:15 बजे पांच लंबे सायरन बजाने के बाद ढालीपुर स्थित आसन बैराज के गेट खोलकर यमुना नदी में लगभग 39 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह जल प्रवाह लगभग तीन घंटे तक जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने यमुना के तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और नदी के किनारे नहीं जाने की अपील की है।

देहरादून जिले में गुरुवार सुबह आठ बजे तक औसतन 32.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार जिले में एक राज्य मार्ग और 13 ग्रामीण मार्ग सहित कुल 14 सड़कें बंद हैं। फिलहाल प्रमुख नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे है और बिजली आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

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